जेकेलोन अस्पताल में नया नियम बना परेशानी, सफाई के नाम पर मरीज के परिजनों को निकाल देते है बाहर
कभी कभी गुजर जाता है 2 घन्टे से भी अधिक का समय
कोटा। संभाग के सबसे बड़े मातृ एवं शिशु रोग (जेके लोन) अस्पताल में नया नियम यहां इलाज कराने आये परिजनों के लिये खासी परेशानी का कारण बना हुआ है। कोटा में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच, अस्पताल प्रशासन का दिल नहीं पसीज रहा है। रोज सुबह सफाई और डॉक्टर्स के राउंड के नाम पर प्रसूताओं के परिजनों को पूरे अस्पताल भवन से बाहर निकाल दिया जाता है। बिल्डिंग के मेन एम्बूलेन्स गेट के बाहर गार्ड तैनात करके किसी भीतर आने की साफ मनाही कर दी जाती है। ऐसे में अस्पताल में अपने मरीज व नवजात की देखरेख के लिये यहां रूक रही महिलाओं को बाहर भटकना पड़ रहा है।
गेट के बाहर इंतजार में रहना मजबूरी
ऐसे में अटेण्ड़र को भी भवन से बाहर निकाल देने से उन्हें पूरे समय उसी गेट के बाहर रहना पड़ता है कि कही भीतर से फोन न आ जाये। यहां सात दिन से इलाज करा रही परिजन राधिका ने बताया कि यहां रोज सुबह बाहर निकाल देते है। इतने समय तक भीतर क्या हो रहा है कोई नहीं बताता।
4 दिनों से दलिया भी नहीं आया
दलिया भी नहीं आता यहां भर्ती मरीजों के लिये सुबह नास्ता भी नहीं दिया जा रहा है। हाथ मैं 10 रूपए का दलिया लेकर खड़े परिजन ने बताया कि मैं बाहर आ गया था,अब जैसे ही गार्ड अन्दर जाने देंगे तब यह दलिया मेरी पत्नी को दुंगा। पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में पहले 4 दिनों तक भर्ती रहें पर कोई नाश्ता नहीं दिया अभी वहां पुताई चल रही है तो हमें नीचें भेज दिया।
रोजाना सडक पर दोनो इंतजार कर रहे
80 वर्षीय पन्नालाल बताते है कि यहां सुबह होते ही सफाई व डॉक्टर. के नाम पर सभी को बिल्कूल बाहर निकाल दिया जाता है। एक मरीज के साथ एक महिला को तो रूकने देना चाहिये। कभी कभी तो 2 घन्टे से भी अधिक का समय गुजर जाता है। अब हम डोकरे डोकरी कहां जाये यहां सड़क पर बैठे रहते हैं। मै तो यहां पिछले 7 दिनों से यही देख रहा हूँ।
माईयां का तो पेट कटरया छ: अर मै यां बार खड़ा कर दिया
बारां जिले की प्रकाशी बाई ने बताया कि बिचारी माईयों के तो पेट कटे हुए हैं, वह तो हिल भी नहीं सकती जब तक हम बाहर है, तब तक उनके बच्चे गंदगी में लिपट भी जाएं अब हम अंदर जाएंगे तभी उनको संभाल पाएंगे। '2-3 घन्टा तो रामजी ही जान' कम से कम एक लुगाई न तो रेहबा देव जिस वे आपणां मरीज अर नवजात न संभाल सक यां तो यो अजब ही नियम छ।
'बिजणी' ही एकमात्र सहारा
अस्पताल परिसर से बाहर खदेड़े जाने के बाद तीमारदारों के लिए कहीं बैठने या धूप से बचने की कोई व्यवस्था नहीं है। कड़कड़ाती धूप में खुले आसमान के नीचे बैठी महिलाओं ने बताया कि लू के थपेड़ों से सिर चकराने लगता है। अस्पताल के भीतर ठंडी हवा और पानी की व्यवस्था तो दूर, बाहर उन्हें एक शेड तक नसीब नहीं है। ऐसे में गांव-कस्बों से आए ये गरीब परिजन हाथ के पंखे बिजणी झलकर इस जानलेवा गर्मी में वॉर्ड का गेट खुलने का इंतजार करते हैं।
अस्पताल में साफ सफाई के लिये वार्ड खाली कराया जाता है। सभी वार्डो से एक साथ नहीं निकाला जाता है अगर ऐसा है तो गलत है।
-डॉ. निर्मला शर्मा अधीक्षक जेके लोन अस्पताल कोटा।

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