असर खबर का : दो घन्टे में ही हुआ चकाचक, लोग बोले अब भी तो हुई सफाई
चेता एमबीएस प्रशासन तो बदले हालात
कोटा। संभाग के सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल परिसर में आखिरकार पांच दिनों बाद प्रशासनिक सुस्ती टूटी। दरअसल यहां स्थित सेन्ट्रल लैब के बाहर सीवरेज चैम्बरर्स ओवर फ्लो होकर सड़क पर उफन रहे थे। यह हालात पिछले पांच दिनों से बने हुये थे । जिसे मंगलवार को नगर निगम की टीम ने उफन रहा सीवरेज और सेप्टिक टैंक का मलबा साफ कर दिया। जिससे पिछले कई दिनों से नर्क भुगत रहे मरीजों और तीमारदारों ने बड़ी राहत की सांस ली। सवाल यह उठता है कि जब नगर निगम और सुपर सकर मशीन के जरिए यह काम मात्र दो घंटे में मुमकिन था, तो इसके लिए पांच दिनों तक मरीजों को परेशान क्यों किया गया? प्रशासन को अपनी इस 'लेट-लतीफी' की कार्यप्रणाली को बदलना होगा ताकि भविष्य में किसी भी संवेदनशील वार्ड या लैब के बाहर ऐसे हालात दोबारा पैदा न हों।
खबर पर तत्काल हुआ असर
'दैनिक नवज्योति' द्वारा मामले को प्रमुखता से उठाते हुये मंगलवार को ''सेन्ट्रल लैब के मेन एन्ट्री के बाहर फैली सीवरेज की गन्दगी'' शीर्षक से प्रकाशित की थी जिसके बाद हरकत में आये एमबीएस प्रशासन ने सफाई के लिये आनन फानन में नगर निगम की टीम को मौके पर बुलवाकर परिसर में दुर्गंध व बीमारी के कारण बन रही सीवरेज के पानी को साफ करवाया गया करीब 2 घन्टे की मशक्कत के बाद पुरा पानी साफ हो गया। जिसके बाद यहां इलाज कराने आये लोगों ने भी राहत की सांस ली।
'सुपर सकर' से दो घंटे में चोक चेंबर किए दुरुस्त
गत शुक्रवार से ही मुख्य सड़क और वहां लगे सीमेंटेड ब्लॉक पूरी तरह बदबूदार पानी में डूबे हुए थे। मंगलवार सुबह जब नगर निगम का सफाई निरीक्षक दस्ता और अस्पताल का अमला हरकत में आया, तो हालात तेजी से बदले। सफाई कर्मियों ने सुपर सकर मशीन की मदद से चोक हो चुके मुख्य चेंबरों की सफाई शुरू की। कड़ी मशक्कत के बाद सड़क पर जमा गंदा पानी और कीचड़ पूरी तरह साफ हो सका।
गंदगी बढ़ा रही थी बीमारी, वहां अब मिली राहत
अस्पताल का यह वही मुख्य मार्ग है जहां रोजाना हजारों मरीज और उनके परिजन गंभीर बीमारियों की जांच के लिए सैंपल देने आते हैं। पिछले पांच दिनों से यहां फैली गंदगी न केवल अस्पताल की सुंदरता पर बदनुमा दाग थी, बल्कि वहां उठ रही तीव्र दुर्गंध से मरीजों का दम घुट रहा था। स्वास्थ्य के मंदिर में ही संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ था, लेकिन मंगलवार दोपहर बाद यहां के हालात पूरी तरह बदले नजर आए।
भुक्तभोगियों ने कहा- 'देर आए, दुरुस्त आए'
गंदगी साफ होने के बाद अस्पताल आने वाले लोगों के चेहरों पर सुकून दिखाई दिया मरीज मकसूद (60 वर्ष) ने बताया, कल जब मैं यहां सैंपल देने आया था, तो पैर रखने तक की जगह नहीं थी, इसी दूषित पानी के बीच से मजबूरन गुजरना पड़ा था। आज प्रशासन चेता है और सफाई हुई है, यह काम पहले दिन ही हो जाना चाहिए था। तीमारदार राहुल शर्मा ने कहा, यहां फैली गंदगी को देखकर मन खराब हो जाता था। आज जब दोबारा यहां आया तो सफाई देखकर बड़ी राहत मिली कि अब लोगों को इस नर्क से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा।

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