त्रिपुरा हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, माता-पिता की मृत्यु के बाद पुत्री का तलाक हुआ, तो वह पारिवारिक पेंशन की हकदार नहीं
तलाकशुदा बेटी को पेंशन पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी बेटी का तलाक पिता की मृत्यु के बाद हुआ है, तो वह सिविल सेवा नियम 2017 के तहत पारिवारिक पेंशन की हकदार नहीं होगी। कोर्ट के अनुसार, पात्रता निर्धारण के लिए पेंशनभोगी की मृत्यु के समय दावेदार की कानूनी स्थिति ही मान्य होगी।
अगरतला। त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि किसी पुत्री का तलाक उसके पिता की मृत्यु के बाद हुआ है, तो वह त्रिपुरा राज्य सिविल सेवा (संशोधित पेंशन) नियम, 2017 के तहत पारिवारिक पेंशन पाने की पात्र नहीं होगी। उज्जला रानी पॉल बनाम अगरतला नगर निगम मामले में न्यायमूर्ति एस दत्ता पुरकायस्थ ने कहा कि पेंशन नियमों के अनुसार पात्रता तय करने के लिए पेंशनभोगी की मृत्यु के समय दावेदार की कानूनी स्थिति महत्वपूर्ण होती है।
अगरतला निवासी पॉल ने पिछले वर्ष पिता की मृत्यु के बाद पारिवारिक पेंशन की मांग को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। उनके पिता अगरतला नगर निगम में मजदूर के पद पर कार्यरत थे और एक अक्टूबर 2004 को सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन प्राप्त कर रहे थे। दो दिसंबर 2018 को उनकी मृत्यु हो गयी थी। उनकी पत्नी का निधन पहले ही हो चुका था। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि उनका विवाह हुआ था, लेकिन विवाह के कुछ समय बाद ही पति ने उनका परित्याग कर दिया था। उन्होंने दावा किया कि वह पिछले 40 वर्षों से अपने पिता के साथ रह रही थीं और उन्हीं पर आश्रित थीं।
अगरतला के पारिवारिक न्यायालय ने हालांकि दोनों पक्षों के बीच समझौते के बाद चार अक्टूबर 2021 को औपचारिक रूप से तलाक की डिक्री जारी की। इसके बाद याचिकाकर्ता ने 23 फरवरी 2022 को पारिवारिक पेंशन के लिए आवेदन किया। अगरतला नगर निगम ने यह कहते हुए उनका आवेदन खारिज कर दिया कि तलाकशुदा पुत्रियों को पेंशन लाभ देने संबंधी संबंधित सरकारी अधिसूचना को निगम ने अपनाया नहीं है। इस निर्णय से असंतुष्ट होकर याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय में न्यायिक पुनर्विचार की मांग की।

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