सड़क हादसों में मारी गई गृहणियों के मुआवजे पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, कम से कम 30 हजार रुपये मानी जाए गृहणियों की आय
परिवार और समाज के निर्माण में अहम भूमिका निभाती हैं गृहणियां
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सड़क हादसो में में जान गंवाने वाली गृहणियों के मुआवजे को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि उनके घरेलू कार्यों का आर्थिक मूल्य कम नहीं आंका जा सकता। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मोटर दुर्घटना दावा मामलों में गृहणियों की न्यूनतम काल्पनिक मासिक आय 30 हजार रुपये मानी जानी चाहिए, ताकि उनके परिवार को उचित मुआवजा मिल सके।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि गृहणियां परिवार और समाज के निर्माण में अहम भूमिका निभाती हैं और वे “राष्ट्र निर्माता” कहलाने की हकदार हैं। अदालत ने यह टिप्पणी पंजाब में वर्ष 2001 में हुए एक सड़क हादसे से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की, जिसमें एक महिला की मृत्यु हो गई थी। उनके पति और तीन बच्चों ने मुआवजे के लिए दावा किया था, लेकिन उन्हें लंबे समय तक न्याय का इंतजार करना पड़ा।
सुप्रीम कोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावा मामलों में देरी पर चिंता जताते हुए सभी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को ऐसे मामलों की निगरानी करने और एक वर्ष के भीतर निपटारे का प्रयास सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि यह फैसला पहले के महत्वपूर्ण निर्णयों के अनुरूप है और इससे भविष्य में गृहणियों की मृत्यु पर मिलने वाले मुआवजे में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

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