टीएमसी को बड़ा झटका: अभिनेत्री कोयल मल्लिक ने राज्यसभा से दिया इस्तीफा, उच्च सदन में तृणमूल के बचे सिर्फ 9 सांसद
टीएमसी के भीतर असंतोष के सुर उभरने लगे
कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी राजनीतिक अनिश्चितता और उथल-पुथल के बीच मशहूर अभिनेत्री और नेता कोयल मल्लिक ने गुरुवार को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। मल्लिक के इस कदम से पहले राज्यसभा सदस्य सुखेंदु शेखर रॉय और सुस्मिता देव भी उच्च सदन से इस्तीफा दे चुके हैं। वहीं, आज ही सुबह एक और टीएमसी सांसद प्रकाश चिक बड़ाइक ने उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन को अपना औपचारिक इस्तीफा सौंपा था। बड़ाइक के इस्तीफे के बाद उच्च सदन में टीएमसी की सदस्य संख्या घटकर 10 रह गई थी, जो दोपहर बाद कोयल मल्लिक के इस्तीफे के साथ ही अब गिरकर महज 9 पर आ गई है।
बंगाली फिल्म इंडस्ट्री की बेहद लोकप्रिय अभिनेत्री कोयल मल्लिक को टीएमसी नेतृत्व द्वारा विधानसभा चुनावों से ठीक पहले राज्यसभा के लिए नामित किया गया था। इसे पार्टी की एक बड़ी रणनीतिक चाल के रूप में देखा गया था। सांसद बनने के बाद कोयल अपने पिता व दिग्गज अभिनेता रंजित मल्लिक और परिवार के साथ नई दिल्ली में नए संसद भवन भी गई थीं और उन्होंने कई मौकों पर पार्टी के चुनाव प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाई थी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कोयल मल्लिक का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब टीएमसी चौतरफा राजनीतिक चुनौतियों और लगातार लग रहे झटकों का सामना कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, अभिनेत्री पिछले कुछ समय से चल रहे राजनीतिक विवादों से खुद को दूर रखना चाहती थीं और उन्होंने इस बढ़ती सियासी हलचल में उलझने के बजाय गरिमापूर्ण तरीके से पद छोड़ना बेहतर समझा। विधानसभा चुनाव के नतीजों की घोषणा के बाद से ही टीएमसी के भीतर असंतोष के सुर उभरने लगे थे। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस्तीफों का यह सिलसिला यहीं नहीं रुकने वाला है और आने वाले दिनों में कुछ और सांसद भी इसी राह पर चल सकते हैं।
हालांकि, पार्टी ने अभी तक इन सामूहिक इस्तीफों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। पद छोड़ने वाले अधिकांश नेताओं ने भी अभी तक अपने भविष्य के राजनीतिक पत्तों को नहीं खोला है। सांसद पद की शपथ लेते समय देश सेवा का संकल्प दोहराने वाली कोयल मल्लिक का महज कुछ महीनों के भीतर ही इस्तीफा दे देना, राष्ट्रीय राजनीति में टीएमसी के घटते प्रभाव और पार्टी के भीतर चल रहे गहरे आंतरिक संकट की ओर साफ इशारा कर रहा है।

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