अल्बानिया: स्केनबेर्ग चौक आंदोलन बना व्यापक सत्ता-विरोधी प्रदर्शन, पीएम एदी रामा के इस्तीफे की मांग

अल्बानिया में भारी जनाक्रोश

अल्बानिया: स्केनबेर्ग चौक आंदोलन बना व्यापक सत्ता-विरोधी प्रदर्शन, पीएम एदी रामा के इस्तीफे की मांग
अल्बानिया की राजधानी तिराना में जैरेड कुशनर की पर्यटन परियोजना के खिलाफ शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब बड़े राजनीतिक आंदोलन में बदल गया है। लगातार 10वें दिन सड़कों पर उतरे हजारों प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री एदी रामा के इस्तीफे की मांग की और सत्तापक्ष व विपक्ष दोनों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

तिराना। यूरोपीय देश अल्बानिया में एक संरक्षित तटीय क्षेत्र में प्रस्तावित पर्यटन विकास परियोजना के विरोध से शुरू हुआ आंदोलन अब एक व्यापक सत्ता-विरोधी आंदोलन में बदल चुका है। बुधवार रात राजधानी तिराना में लगातार 10वें दिन हजारों लोग सड़कों पर उतरे और प्रधानमंत्री एदी रामा के इस्तीफे की मांग की। रिपोर्ट के अनुसार प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार और मुख्य विपक्षी दल दोनों ही देश की राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों का समाधान करने में पूरी तरह विफल रहे हैं।

राजधानी तिराना के स्केनबेर्ग चौक पर भारी संख्या में प्रदर्शनकारी एकत्र हुए और वहां से संसद भवन की ओर मार्च किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने ‘रामा जेल में, बेरीशा जेल में’ के नारे लगाये। यहां ‘बेरीशा’ का संदर्भ पूर्व प्रधानमंत्री और वर्तमान में ‘डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ अल्बानिया’ के अध्यक्ष सालि बेरीशा से है, जिससे साफ है कि जनता सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों से नाराज है। यह विरोध प्रदर्शन मूल रूप से पीशे पोरो क्षेत्र और साज़ान द्वीप पर एक प्रस्तावित पर्यटन विकास परियोजना के खिलाफ शुरू हुआ था। यह परियोजना अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जैरेड कुशनर से जुड़े एक उद्यम द्वारा एक संरक्षित तटीय क्षेत्र में निवेश से संबंधित है। 

पर्यावरण और स्थानीय हितों को लेकर शुरू हुआ यह विरोध अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है, जो सरकार की विभिन्न नीतियों और कानूनों को चुनौती दे रहा है। आंदोलन के दसवें दिन आयोजकों ने इसे एक राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन का रूप दिया। प्रदर्शनकारी नेताओं ने देश और विदेशों में रहने वाले सभी अल्बानियाई लोगों से इस रैली में शामिल होने का आह्वान किया था। इस रैली को जानबूझकर ‘लीग ऑफ प्रिजरेन’ की स्थापना की वर्षगांठ के दिन आयोजित किया गया था, जो 19वीं सदी की एक ऐतिहासिक घटना है और अल्बानियाई राष्ट्रीय एकता का एक बड़ा प्रतीक मानी जाती है।

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