अभिषेक बनर्जी को बड़ी राहत: कलकत्ता हाई कोर्ट ने 'हस्ताक्षर जालसाजी' मामले में गिरफ्तारी पर 21 दिनों की लगाई रोक, दो सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई

21 दिनों तक दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा

अभिषेक बनर्जी को बड़ी राहत: कलकत्ता हाई कोर्ट ने 'हस्ताक्षर जालसाजी' मामले में गिरफ्तारी पर 21 दिनों की लगाई रोक, दो सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी को 21 दिनों तक दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा दी है। कोर्ट ने सीआईडी जांच में पूर्ण सहयोग की शर्त पर यह राहत दी, जिसके बाद वे भवानी भवन मुख्यालय में पेश होने के लिए सहमत हुए। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।

कोलकाता। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को एक बड़ी राहत देते हुए कथित 'हस्ताक्षर जालसाजी' मामले में अगले 21 दिनों तक किसी भी दंडात्मक कार्रवाई या गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान कर दी है। न्यायमूर्ति कौशिक चंदा की एकल-न्यायाधीश अवकाशकालीन पीठ ने साथ में यह साफ कर दिया है कि यह राहत पूरी तरह से इस शर्त पर निर्भर करेगी कि वे राज्य के आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) की जांच में पूरी तरह सहयोग करें।

यह आदेश तब आया जब बनर्जी के वकील अयान भट्टाचार्य ने न्यायालय को आश्वस्त किया कि उनके मुवक्किल गुरुवार शाम 6 बजे ही कोलकाता के भवानी भवन स्थित सीआईडी मुख्यालय में जांचकर्ताओं के सामने पेश होंगे और भविष्य में भी जब भी जरूरत होगी, वे सुबह 10 बजे से रात 10 बजे के बीच एजेंसी के समन का जवाब देंगे। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि आज शाम की पूछताछ प्रक्रिया पूरी होने के बाद वे वहां से जाने के लिए स्वतंत्र होंगे और अब इस मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी, जिसमें सीआईडी को अपनी प्रगति रिपोर्ट सौंपनी होगी।

गौरतलब है कि यह पूरा कानूनी विवाद पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नामित करने वाले एक प्रस्ताव पत्र से जुड़ा है, जिसे 20 मई को विधानसभा अध्यक्ष को सौंपा गया था। इस पत्र पर बनर्जी के भी हस्ताक्षर थे, लेकिन टीएमसी के ही दो विधायकों, ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने शिकायत दर्ज कराई कि इस दस्तावेज़ पर उनके फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं। राज्य सरकार और अभियोजन पक्ष ने अदालत में दलील दी कि इस प्रस्ताव की तारीखों में भारी विसंगतियां हैं, क्योंकि रिकॉर्ड के अनुसार विधायकों ने 6 मई को हस्ताक्षर किए थे, जबकि बाद में कहा गया कि यह बैठक 19 मई को हुई थी। कई विधायकों ने जांचकर्ताओं को लिखित में दिया है कि 6 मई को ऐसी कोई बैठक ही नहीं हुई थी और न ही उन्होंने किसी प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए थे।

अभिषेक बनर्जी ने सीआईडी द्वारा पहले भेजे गए तीन समन की अनदेखी की थी और स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर पेश नहीं हुए थे, जिसके बाद बार-बार मिल रहे नोटिस और गिरफ्तारी की आशंका के खिलाफ उन्होंने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

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