42वें पंडित मनमोहन भट्ट राष्ट्रीय स्मृति संगीत महोत्सव : शिव वंदना से गूंजी सुर साधना, बांसुरी के सुरीले स्वर और शास्त्रीय गायन ने बांधा समां
पहले दिन 6 विभूतियां राष्ट्रीय संगीत सम्मान से अलंकृत
जयपुर। आरआईसी के मुख्य सभागार में सोमवार शाम आयोजित दो दिवसीय 42वें पंडित मनमोहन भट्ट राष्ट्रीय स्मृति संगीत महोत्सव का आगाज भक्ति, शास्त्रीय संगीत और नृत्य की अनुपम प्रस्तुतियों के साथ हुआ। देश के ख्यातिप्राप्त कलाकारों ने अपनी साधना का ऐसा रंग बिखेरा कि पूरा सभागार देर तक तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा। समारोह में छह विशिष्ट विभूतियों को पंडित मनमोहन भट्ट स्मृति सम्मान दिया।
शिव वंदना से हुई शुरुआत, कथक ने मोहा मन :
दो दिवसीय महोत्सव का शुभारंभ अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथक नृत्यांगना शिंजिनी कुलकर्णी की मनोहारी प्रस्तुति से हुआ। उन्होंने शिव वंदना के माध्यम से भक्तिरस का सुंदर संचार किया। इसके बाद अपने गुरु पद्मविभूषण पंडित बिरजू महाराज की चर्चित रचना लक्ष्य की प्रस्तुति दी, जो तीनताल पर आधारित थी। उनकी सधी हुई पदचाप, प्रभावशाली मुद्राओं और सशक्त भावाभिव्यक्ति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। जयपुर की गायिका मनीषा अग्रवाल की आवाज में तैयार वीडियो फिल्म पधारो म्हारे देस का एलईडी स्क्रीन पर प्रदर्शन किया गया।
बांसुरी और गायन ने बिखेरा सुरों का जादू :
असम के बांसुरी वादक निबिर देव शर्मा ने राग दुर्गा और असमिया लोकधुनों की मनभावन प्रस्तुति देकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। इसके बाद ग्वालियर के शास्त्रीय गायक पंडित उमेश कंपूवाले ने राग चम्पाकली में मध्य और द्रुत तीनताल की बंदिशें प्रस्तुत कर अपनी गायकी का उत्कृष्ट परिचय दिया।
6 विभूतियां हुई सम्मानित :
समारोह में संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वम्भर नाथ मिश्र, कथक नृत्यांगना शिंजिनी कुलकर्णी, शास्त्रीय गायक पंडित उमेश कंपूवाले, तबला वादक पंडित बद्री नारायण, वायलिन वादक पंडित मनभावन डांगी तथा जयपुर की गायिका मनीषा अग्रवाल को पंडित मनमोहन भट्ट स्मृति राष्ट्रीय संगीत सम्मान से अलंकृत किया गया। सम्मान पद्मभूषण पंडित विश्व मोहन भट्ट व तंत्री सम्राट पंडित सलिल भट्ट ने प्रदान किए।

Comment List