नगर निगम की अनूठी पहल : शिवालयों में चढ़े पत्र-पुष्प अब नहीं जाएंगे कचरे में, शिवार्पणम के तहत मंदिरों के निर्माल्य से बनेगी जैविक खाद

प्रसाद पैकेट के रूप में वितरित किया जाएगा

नगर निगम की अनूठी पहल : शिवालयों में चढ़े पत्र-पुष्प अब नहीं जाएंगे कचरे में, शिवार्पणम के तहत मंदिरों के निर्माल्य से बनेगी जैविक खाद
नगर निगम ने सावन में धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ते हुए ‘शिवार्पणम’ अभियान शुरू। प्रमुख शिवालयों से एकत्र बेलपत्र, पुष्प और जैविक निर्माल्य से वैज्ञानिक विधि द्वारा खाद बनाई जाएगी। पायलट परियोजना में पांच मंदिर शामिल।

जयपुर। सावन के पावन माह में श्रद्धा और पर्यावरण संरक्षण को एक सूत्र में पिरोते हुए नगर निगम ने एक अभिनव पहल शिवार्पणम की शुरुआत की है। इस पहल के माध्यम से शहर के प्रमुख शिवालयों में भगवान शिव को अर्पित होने वाले बेलपत्र, पुष्प एवं अन्य जैविक निर्माल्य को अब कचरे में नहीं फेंका जाएगा, बल्कि वैज्ञानिक विधि से जैविक खाद बनाया जाएगा। पायलट परियोजना के अंतर्गत ताड़केश्वर महादेव, झारखंड महादेव, जंगलेश्वर महादेव, चमकारेश्वर महादेव और रोजगारेश्वर महादेव मंदिरों से इस अभियान की शुरुआत होगी। नगर निगम आयुक्त ओम कसेरा ने बताया कि भगवान शिव को अर्पित हुआ प्रत्येक बेलपत्र और पुष्प श्रद्धा का प्रतीक है। उसका स्थान कचरे में नहीं, बल्कि धरती की सेवा में होना चाहिए। शिवार्पणम आस्था, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ने वाला एक अभिनव मॉडल है। सावन में आमजन की श्रद्धा भाव के चलते शिवालयों में भीड़-भाड़ अधिक रहती है और भक्तजन शिवालयों में भगवान शिव को बेलपत्र, पुष्प एवं अन्य जैविक निर्माल्य अर्पित करते है। उन्होंने बताया कि निगम का उद्देश्य धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि शिवालयों से बेलपत्र, पुष्प एकत्रित कर कम्पोस्ट पिट में वैज्ञानिक विधि से जैविक खाद तैयार की जाएगी और श्रद्धालुओं एवं आमजन को शिवार्पणम प्रसाद पैकेट के रूप में वितरित किया जाएगा।

क्या है शिवार्पणम ?

सावन के दौरान प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु शिवालयों में जलाभिषेक एवं पूजा अर्चना करते हैं, जिनमें बड़ी मात्रा में बेलपत्र, पुष्प और अन्य जैविक निर्माल्य अर्पित किया जाता है। अब इन पवित्र अवशेषों को वैज्ञानिक प्रक्रिया से लगभग 30 दिनों में जैविक खाद में परिवर्तित किया जाएगा। इससे मंदिर परिसरों में स्वच्छता होगी, डंपिंग यार्ड पर जैविक कचरे में कमी दूर होगी, अतिरिक्त निवेश के बिना मौजूदा संसाधनों का उपयोग हो सकेगा, जैविक खाद के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण होने के साथ ही धार्मिक आस्था और सर्कुलर इकोनॉमी का समन्वय होगा।

इन मंदिरों से एकत्र की जाएगी सामग्री : ताड़केश्वर महादेव से प्राप्त सामग्री को जयनिवास उद्यान, पौंड्रिक उद्यान एवं कल्पना चावला पार्क में, झारखंड महादेव से परिवहन नगर श्मशान पार्क , उदयनगर पार्क, एनबीसी श्मशान पार्क में, जंगलेश्वर महादेव से कंवर कानन पार्क, दीनदयाल उपाध्याय पार्क डी सर्किल पार्क में, चमकारेश्वर महादेव से राष्ट्रपति मैदान पार्क, केशव पार्क राघव कानन पार्क तथा रोजगारेश्वर महादेव मंदिर से चित्रकूट पार्क, भगत सिंह पार्क एवं भारत माता उद्यानों में पहुंचाया जाएगा।

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