वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे : राजस्थान में हेपेटाइटिस के साइलेंट केस बढ़े, हाई-रिस्क ग्रुप में 3.2 प्रतिशत तक पॉजिटिविटी
गर्भवती महिलाओं के लिए अधिक खतरनाक हेपेटाइटिस-ई
जयपुर। राजस्थान में हेपेटाइटिस जैसी गंभीर, लेकिन अक्सर नजरअंदाज की जाने वाली बीमारी को लेकर हाल के वर्षों में चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। राज्य सरकार के विशेष स्क्रीनिंग अभियानों में जेलों, आश्रय गृहों और अन्य हाई-रिस्क समूहों में हेपेटाइटिस-बी की पॉजिटिविटी दर 3.2 प्रतिशत तक दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि बड़ी संख्या में मरीजों में बीमारी लंबे समय तक बिना किसी लक्षण के रहती है, जिससे संक्रमण का पता देर से चलता है और यह दूसरों तक भी फैल सकता है।
चौंकाने वाले हैं आंकड़े : उस्वास्थ्य विभाग द्वारा कराई गई स्क्रीनिंग में 7.19 लाख लोगों की हेपेटाइटिस-बी जांच में 8826 संक्रमित मिले, यानी संक्रमण दर 1.23 प्रतिशत रही। वहीं 4.70 लाख लोगों की हेपेटाइटिस-सी जांच में 2459 मरीज पॉजिटिव पाए गए, जिससे संक्रमण दर 0.52 प्रतिशत रही।
साइलेंट इंफेक्शन सबसे बड़ी चुनौती : महात्मा गांधी अस्पताल के सीनियर गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ. संदीप निझावन ने बताया कि हेपेटाइटिस के कई मामले साइलेंट इंफेक्शन के रूप में सामने आते हैं। संक्रमित व्यक्ति को वर्षों तक बीमारी का पता नहीं चलता लेकिन इस दौरान वायरस लीवर को लगातार नुकसान पहुंचाता रहता है। ऐसे में नियमित जांच, समय पर उपचार और हेपेटाइटिस-बी का टीकाकरण ही सबसे प्रभावी बचाव है।
बच्चों से वयस्कों की ओर बढ़ा हेपेटाइटिस-ए : सीनियर गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ. मुकेश कल्ला बताते हैं कि पिछले एक दशक में हेपेटाइटिस-ए का स्वरूप बदल गया है। पहले यह बीमारी मुख्य रूप से बच्चों में होती थी लेकिन अब अधिक मामले युवाओं और वयस्कों में सामने आ रहे हैं। बेहतर स्वच्छता के कारण बचपन में संक्रमण कम होने से प्राकृतिक प्रतिरक्षा विकसित नहीं हो पाती। ऐसे में वयस्क अवस्था में संक्रमण होने पर लिवर को गंभीर क्षति और एक्यूट लिवर फेलियर का खतरा बढ़ जाता है।
गर्भवती महिलाओं के लिए अधिक खतरनाक हेपेटाइटिस-ई : सीनियर गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ. हर्ष उदावत के अनुसार हेपेटाइटिस-ई अब संक्रमण के रूप में सामने आ रहा है। गर्भावस्था, विशेषकर अंतिम तिमाही में यह संक्रमण अत्यंत गंभीर हो सकता है और लिवर फेलियर के साथ मातृ मृत्यु का जोखिम भी बढ़ा सकता है।
हेपेटाइटिस के प्रमुख लक्षण :
लगातार थकान और कमजोरी
भूख कम लगना, मतली या उल्टी
आंखों और त्वचा का पीला पड़ना
गहरे रंग का पेशाब
पेट के दाहिने हिस्से में दर्द या सूजन
बुखार और शरीर में दर्द
गंभीर मामलों में लिवर फेलियर के लक्षण
ऐसे करें बचाव :
हेपेटाइटिस-बी का टीका समय पर लगवाएं।
हमेशा स्वच्छ और उबला या फिल्टर किया हुआ पानी पिएं।
साफ सुथरा और ताजा भोजन ही खाएं।
केवल जांचा हुआ रक्त ही चढ़वाएं।
डिस्पोजेबल सिरिंज और सुरक्षित चिकित्सा उपकरणों का उपयोग करें।
संक्रमित व्यक्ति के रेजर, टूथब्रश या सुई साझा न करें।
गर्भवती महिलाएं नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं।
जोखिम वाले लोगों को समय-समय पर हेपेटाइटिस-बी और सी की जांच अवश्य करानी चाहिए।

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