चार शुभ योगों के दुर्लभ संयोग में रखेंगे निर्जला एकादशी व्रत : मंदिरों में रहेगी दान-पुण्य की धूम, सजेगी विशेष झांकी
वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण एवं पुण्यदायी एकादशी
जयपुर। ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी गुरुवार को मनाई जाएगी। सनातन धर्म में इसे वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण एवं पुण्यदायी एकादशी माना है। इस बार निर्जला एकादशी पर रवि योग, सिद्धि योग, शिव योग और लक्ष्मी नारायण योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। जिससे व्रत, जप, तप, दान और भगवान विष्णु की आराधना का महत्व और अधिक बढ़ गया है। ज्योतिषाचार्य डॉ.महेन्द्र मिश्रा के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत करने से वर्षभर की सभी एकादशियों के समान पुण्य प्राप्त होता है। इस दिन श्रद्धालु अन्न के साथ जल का त्याग कर भगवान विष्णु का स्मरण, पूजा-अर्चना एवं भजन-कीर्तन करते हैं।
ज्योतिषीय दृष्टि से इस बार बन रहा लक्ष्मी नारायण योग विशेष शुभ माना जा रहा है। मान्यता है कि इसके प्रभाव से आर्थिक उन्नति, रुका हुआ धन प्राप्त होने, निवेश में लाभ, व्यापार में प्रगति तथा लंबे समय से अटके कार्यों में गति मिलने के योग बन सकते हैं।
नहीं पड़ेगा भद्रा का प्रभाव :
पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 24 जून की रात्रि 8.09 बजे प्रारंभ होकर 25 जून की रात्रि 9.14 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून को रखा जाएगा तथा अगले दिन द्वादशी तिथि में विधिपूर्वक पारण किया जाएगा। इस वर्ष एकादशी पर भद्रा का प्रभाव भी रहेगा, किंतु भद्रा का वास पाताल लोक में होने के कारण पूजा-पाठ, जप, दान एवं धार्मिक अनुष्ठानों पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं माना है। श्रद्धालु पूरे दिन भगवान विष्णु की आराधना एवं धार्मिक कार्य कर सकेंगे।

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