एआई से बनाई शादी और हनीमून की फर्जी तस्वीरें, सोशल मीडिया पर कीं पोस्ट
भोपाल में युवती के मोहल्ले में बंटवाए गोद भराई के कार्ड
उदयपुर। शादी का प्रस्ताव ठुकराना एक युवक को इतना नागवार गुजरा कि उसने युवती को परेशान एवं बदनाम करने की नीयत से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तकनीक का दुरुपयोग कर शादी एवं हनीमून के मनगढ़ंत साक्ष्य तैयार कर साझा कर दिए। उसकी इन हरकतों से आहत होकर पीड़ित युवती मध्यप्रदेश महिला आयोग के समक्ष पहुंची। मामला उदयपुर के युवक और मध्यप्रदेश के भोपाल की युवती से जुड़ा है। पीड़िता ने महिला आयोग में दर्ज शिकायत में बताया कि उसकी बहन ने विवाह के उद्देश्य से एक वैवाहिक वेबसाइट पर प्रोफाइल बनाई थी। इसी दौरान उदयपुर निवासी युवक से संपर्क हुआ। दोनों परिवारों की सहमति से एक मुलाकात भी हुई, लेकिन युवती और उसके परिवार ने रिश्ते को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया। प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद युवक ने लगातार युवती से संपर्क करने का प्रयास शुरू कर दिया। वह बार-बार फोन कॉल और संदेश भेजकर बातचीत के लिए दबाव बनाता रहा। परेशान होकर युवती ने उसका नंबर ब्लॉक कर दिया। मामले ने तब गंभीर रूप ले लिया जब कथित तौर पर आरोपी ने एआई तकनीक का इस्तेमाल कर युवती की शादी और हनीमून की फर्जी तस्वीरें तैयार की। इन तस्वीरों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया गया।
मेहमानों को चांदी का सिक्का देने का वादा
आरोपी ने केवल सोशल मीडिया तक ही खुद को सीमित नहीं रखा। उसने उसकी गोद भराई के फर्जी निमंत्रण पत्र भी छपवाए और स्थानीय हॉकरों के माध्यम से पूरी कॉलोनी में बंटवा दिए। इन निमंत्रण पत्रों में कार्यक्रम में आने वाले मेहमानों को चांदी का सिक्का देने का उल्लेख किया गया था, ताकि अधिक से अधिक लोग कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे और भ्रम तथा असहज स्थिति उत्पन्न हो।
कैब चालकों का समय और संसाधान व्यर्थ
जनवरी 2026 में आरोपी ने ऑनलाइन कैब सेवाओं का दुरुपयोग कर युवती के घर के पते पर बड़ी संख्या में टैक्सी और बाइक बुक कराईं। एक ही दिन में लगभग 500 कैब और बाइक उसके घर पहुंच गई। कई बुकिंग लंबी दूरी की थी। इससे न केवल परिवार को परेशानी हुई बल्कि बड़ी संख्या में कैब चालकों का समय और संसाधन भी व्यर्थ हुए।
मॉफिंर्ग के गंभीर खतरे उजागर
साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला आधुनिक दौर में बढ़ती साइबर स्टॉकिंग, डिजिटल उत्पीड़न, पहचान की चोरी और एआई आधारित मॉफिंर्ग के गंभीर खतरों को उजागर करता है। विशेषज्ञों के अनुसार किसी व्यक्ति की अनुमति के बिना उसकी फर्जी तस्वीरें तैयार करना, उन्हें सार्वजनिक करना या उसकी पहचान का दुरुपयोग करना निजता के अधिकार का उल्लंघन है। ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

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