विश्व सिकल सेल दिवस : सिकल सेल पर आरएनटी की सर्जिकल स्ट्राइक, 621 बच्चों की बची जिंदगी
इस वर्ष दिवस की थीम क्लोजिंग द सर्वाइवल गैप
उदयपुर। दक्षिण राजस्थान के आदिवासी अंचल में लंबे समय से सिकल सेल एनीमिया एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती के रूप में मौजूद है। विशेष रूप से जनजातियों में अधिक पाए जाने वाले इस आनुवंशिक रोग के कारण हजारों परिवार प्रभावित होते रहे हैं। ऐसे में रवींद्रनाथ टैगोर (आरएनटी) मेडिकल कॉलेज का सेंटर ऑफ कॉम्पिटेंस फॉर सिकल सेल डिजीज इस बीमारी के खिलाफ एक मजबूत हथियार बनकर उभरा है। केंद्र की सक्रिय पहल के चलते अब तक 32 हजार नवजात शिशुओं की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिनमें 621 सिकल सेल पॉजिटिव बच्चों की समय रहते पहचान कर उपचार शुरू किया गया, जिसस उनकी जिंदगी बची है। अनेक बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सका है। विश्व सिकल सेल दिवस के अवसर पर शुक्रवार को आरएनटी मेडिकल कॉलेज एवं संबद्ध चिकित्सालयों में जागरूकता कार्यक्रम, संगोष्ठियां और विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे।
इस वर्ष दिवस की थीम क्लोजिंग द सर्वाइवल गैप: इक्विटी इन सिकल सेल केयर रखी गई है, जिसका उद्देश्य प्रत्येक मरीज तक समान रूप से गुणवत्तापूर्ण जांच, उपचार और देखड्टााल सुनिश्चित करना है। सिकल सेल एनीमिया एक आनुवंशिक रक्त विकार है, जिसमें लाल रक्त कोशिकाएं सामान्य गोल आकार के बजाय हंसिया (सिकल) के आकार की हो जाती हैं। इससे शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह प्रभावित होता है और मरीज को बार-बार दर्द, एनीमिया, संक्रमण तथा कई गंड्टाीर जटिलताओं का सामना करना पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार देश में करीब एक से डेढ़ करोड़ लोग सिकल सेल जीन के वाहक (कैरियर) हैं जबकि डेढ़ लाख से अधिक लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं।

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