दावों की डोज पूरी, सप्लाई अधूरी : दवा तो दूर, सिरिंज तक के लिए भटक रहे मरीज
बाहर से ज्यादा पैसे देकर दवा खरीदने को मजबूर जनता
जयपुर। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एसएमएस में मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना की जमीनी हकीकत सरकारी दावों से बिल्कुल अलग दिख रही है। अस्पताल प्रशासन पर्याप्त दवा उपलब्ध होने का दावा कर रहा है, लेकिन मरीजों और उनके परिजन जरूरी दवाओं, इंजेक्शन और डिस्पोजेबल सामग्री के लिए भटकने को मजबूर हैं। हालत यह है कि कई मरीजों को दवा तो दूर 5 और 10 एमएल की सिरिंज तक बाजार से खरीदनी पड़ रही है। हाल ही में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के अस्पताल दौरे के दौरान दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता का दावा किया गया था, लेकिन हकीकत उलट नजर आ रही है। कई जरूरी दवाएं स्टॉक से बाहर हैं। सबसे अधिक परेशानी हृदय रोग, मधुमेह, मिर्गी, अस्थमा, मानसिक रोग और पार्किंसन जैसे गंभीर रोग से पीड़ित मरीजों को झेलनी पड़ रही है, जिन्हें नियमित दवा की आवश्यकता होती है।
काउंटर से काउंटर तक भटक रहे मरीज: धन्वंतरि ओपीडी स्थित दवा वितरण केंद्रों पर भी मरीजों की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं। कई मरीजों को डॉक्टर की लिखी गई पूरी दवा नहीं मिल रही।
स्टॉक नहीं होने पर उन्हें काउंटर नंबर 10 और 11 पर भेजा जाता है लेकिन वहां भी निराशा हाथ लगती है। दौसा से आए मरीज नरेन्द्र और जयपुर के हुसैन ने बताया कि कुछ दवाएं कई दिनों से उपलब्ध नहीं हैं। मजबूरी में निजी मेडिकल स्टोर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए यह अतिरिक्त खर्च बड़ा बोझ बन रहा है। आईसीयू में भी संकट, परिजन परेशान: यह स्थिति केवल ओपीडी तक सीमित नहीं है। अस्पताल के आईसीयू जैसे संवेदनशील विभागों में भर्ती मरीजों के परिजन भी पिछले 8 से 10 दिनों से आवश्यक दवाओं और डिस्पोजेबल सामग्री के लिए परेशान हैं।
ये दवाएं उपलब्ध नहीं
-5 एवं 10 एमएल सिरिंज, इंसुलिन-आर, एनएस 3 प्रतिशत 100 एमएल इंजेक्शन, सक्शन कैथेटर, नेबुलाइजर, विटामिन-डी, विटामिन-सी, कैल्शियम व पोषण संबंधी दवाएं उपलब्ध नहीं हैं।
अधिकांश दवाएं उपलब्ध
अधिकांश दवाएं उपलब्ध हैं। कुछ दवाओं की कमी है, जिन्हें मांग के अनुसार मंगवाकर उपलब्ध कराया जा रहा है। हमारी पूरी कोशिश है कि मरीजों को बिना दवा नहीं भेजा जाए।
डॉ. प्रदीप शर्मा, अतिरिक्त अधीक्षक एवं प्रवक्ता एसएमएस अस्पताल

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