विदेश मंत्रायल का बड़ा बयान: पासपोर्ट यात्रा दस्तावेज, नागरिकता का प्रमाण नहीं, जानिए क्या है नागरिकता का नियम ?

पासपोर्ट सेवा दिवस

विदेश मंत्रायल का बड़ा बयान: पासपोर्ट यात्रा दस्तावेज, नागरिकता का प्रमाण नहीं, जानिए क्या है नागरिकता का नियम ?
विदेश मंत्रालय ने 14वें पासपोर्ट सेवा दिवस पर स्पष्ट किया कि पासपोर्ट यात्रा दस्तावेज है, नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं। वर्ष 2025 में 1.5 करोड़ से अधिक सेवाएं दी गईं और पासपोर्ट केंद्र बढ़कर 545 हो गए हैं। भारत में नागरिकता का निर्धारण नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत होता है।

नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय (MEA) ने 14वें पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट भारतीय नागरिकों को ही जारी किया जाता है, लेकिन इसे नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। मंत्रालय के अनुसार पासपोर्ट का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा को सुगम बनाना है और यह एक ट्रैवल डॉक्यूमेंट है। इस स्पष्टीकरण के बाद नागरिकता साबित करने वाले दस्तावेजों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। मंत्रालय ने बताया कि पासपोर्ट भारत सरकार की संपत्ति होता है और आवश्यकता पड़ने पर इसे वापस लिया जा सकता है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट भी आधार कार्ड को नागरिकता का प्रमाण मानने से इनकार कर चुका है, जबकि वोटर आईडी को भी केवल पहचान और मतदान संबंधी दस्तावेज माना जाता है।

इस अवसर पर मंत्रालय ने पासपोर्ट सेवाओं में हुए विस्तार की जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2025 में 1.5 करोड़ से अधिक सेवाएं प्रदान की गईं। देशभर में पासपोर्ट केंद्रों की संख्या बढ़कर 545 हो गई है और औसतन छह कार्य दिवस में पासपोर्ट जारी किए जा रहे हैं।

क्या है नागरिकता का नियम

भारत में नागरिकता का निर्धारण नागरिकता अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के तहत किया जाता है। गृह मंत्रालय के अनुसार किसी व्यक्ति को जन्म, वंश, पंजीकरण, प्राकृतिककरण अथवा किसी क्षेत्र के भारत में विलय के आधार पर भारतीय नागरिकता प्राप्त हो सकती है। देश में अब तक ऐसा कोई एकल दस्तावेज या राष्ट्रीय नागरिकता कार्ड लागू नहीं किया गया है, जिसे सभी नागरिकों के लिए अनिवार्य नागरिकता प्रमाण माना जाए।

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विशेषज्ञों के अनुसार, जन्म से भारतीय नागरिक बनने वाले अधिकांश लोगों के पास अलग से नागरिकता प्रमाण पत्र नहीं होता, क्योंकि उनकी नागरिकता कानून के तहत स्वतः मान्य होती है। वहीं, वे व्यक्ति जो पंजीकरण या प्राकृतिककरण की प्रक्रिया के माध्यम से भारतीय नागरिकता हासिल करते हैं, उन्हें सरकार की ओर से आधिकारिक नागरिकता प्रमाण पत्र (सिटिजनशिप सर्टिफिकेट) जारी किया जाता है। यही दस्तावेज ऐसे मामलों में नागरिकता का औपचारिक प्रमाण माना जाता है। नागरिकता संबंधी नियम और पात्रता की शर्तें नागरिकता अधिनियम में निर्धारित हैं।

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