चिकित्सक विहीन अस्पतालए मरीजों की बढ़ी परेशानी
30 बेड अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित
देईखेड़ा। क्षेत्र के प्रमुख राजकीय अस्पताल देईखेड़ा में स्थायी चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं होने से स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर संकट का सामना कर रही हैं। 30 बेड क्षमता वाले इस अस्पताल में लंबे समय से चिकित्सकों के पद रिक्त पड़े हैंए जिससे मरीजों को सामान्य उपचार के लिए भी परेशान होना पड़ रहा है। गंभीर रोगियों को प्राथमिक उपचार के बाद अन्य अस्पतालों के लिए रेफर करना मजबूरी बन गया है।
इस अस्पताल का महत्व इसलिए अधिक है कि यह मेगा हाईवे तथा दिल्ली.मुंबई एक्सप्रेस.वे से जुड़े क्षेत्र का प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य केंद्र है। इन मार्गों पर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों को सबसे पहले इसी अस्पताल में लाया जाता है। हालांकि चिकित्सकों की कमी के कारण घायलों को आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने में कठिनाई होती है और उन्हें अन्य अस्पतालों में भेजना पड़ता है।
देईखेड़ाए घाट का बरानाए लबानए चहिचाए झपायताए कोटड़ीए आजन्दाए बलदेवपुराए लबान कोटाखुर्दए गुहाटा और छप्पनपुरा सहित दो दर्जन से अधिक गांवों की आबादी इस अस्पताल पर निर्भर है। ग्रामीणों का कहना है कि रिक्त पदों के कारण अस्पताल अपनी क्षमता के अनुरूप सेवाएं नहीं दे पा रहा है। दुर्घटनाए प्रसूति और गंभीर बीमारियों के मामलों में मरीजों को तत्काल अन्य अस्पतालों में भेजना पड़ता है।
ग्रामीण हनुमान गुर्जरए अजय मीणा और शुभम नंदवाना ने सरकार तथा चिकित्सा विभाग से अस्पताल में स्थायी चिकित्सकों की शीघ्र नियुक्ति की मांग की हैए ताकि क्षेत्रवासियों को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।
यह कहा अधिकारी ने
देईखेड़ा अस्पताल में व्यवस्था के लिए लगाए गए चिकित्सक ने कार्य से त्यागपत्र दे दिया है। सरकार के स्तर पर चिकित्सकों की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही समस्या का समाधान होने की उम्मीद है। वर्तमान में अन्य अस्पताल से चिकित्सक लगाकर व्यवस्था करना संभव नहीं है।
- जितेंद्र सेंगरएब्लॉक सीएचएमओ।

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