7 साल से टूटी पुलिया व जर्जर सड़क बनी मुसीबत, जानें पूरा मामला
पांच लोगों की जान जाने के बाद भी गंभीर नहीं अधिकारी
सात करोड़ की मंजूरी और वन विभाग की अनुमति के बावजूद शुरू नहीं हुआ निर्माण कार्य।
रावतभाटा। रावतभाटा क्षेत्र की लुहारिया ग्राम पंचायत में पिछले सात वर्षों से टूटी पुलिया और जर्जर सड़क ग्रामीणों के लिए बड़ी मुसीबत बनी हुई है। हर बारिश में कई गांवों का संपर्क कट जाता है और अब तक पांच लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन करोड़ों की मंजूरी और विभागीय अनुमति के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। जानकारी के अनुसार लुहारिया ग्राम पंचायत में पिछले सात वर्षों से से कटूटी पुलिया और जर्जर सड़क ग्रामीणों के लिए मौत का रास्ता बन चुकी है। हर मानसून में आधा दर्जन से अधिक गांवों का का संपर्क पूरी पूरी तरह कट जाता है। करीब तीन महीने तक ग्रामीणों का आवागमन बाधित रहता है और गांव टापू में तब्दील हो जाते हैं।
ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2019 से पुलिया क्षतिग्रस्त पड़ी है, लेकिन आज तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया। हालात इतने गंभीर हैं कि अब तक पांच लोगों की जान जा चुकी है। इसके बावजूद और जनप्रतिनिधि समस्या के समाधान को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि हर वर्ष वे आपस में चंदा एकत्रित कर अस्थायी पुलिया तैयार करते हैं, लेकिन तेज बारिश और बहाव में वह कुछ ही दिनों में बह जाती है। इसके बाद गांवों का संपर्क पूरी तरह टूट जाता है और लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
प्रशासनिक उदासीनता पर उठाए सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिया निर्माण के लिए सीएसआर मद से करीब 7 करोड़ रुपए की मंजूरी मिल चुकी है। वन विभाग की अनुमति भी प्राप्त हो चुकी है। लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया। इससे प्रशासनिक प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शिक्षा और इलाज पर पड़ रहा असर
बरसात के दौरान हालात इतने खराब हो जाते हैं कि मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते और बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है। कई बारग्रामीणों को जरूरी कामों के लिए जान जोखिम में डालकर पानी से गुजरना पड़ता है। अब मानसून नजदीक आते ही ग्रामीणों की चिंता फिर बढ़ गई है।
इनका कहना है
हर साल ग्रामीण आपस में पैसे एकत्रित कर अस्थायी रास्ता तैयार करते हैं। लेकिन तेज बारिश और बहाव में वह बह जाता है। ऐसे हालात बन जाते हैं कि गांव से बाहर निकलने तक का रास्ता नहीं बचता और लोगों को जान जोखिम में डालकर आवागमन करना पड़ता है।
- मुकेश मीणा, ग्रामीण
वनविभाग की ओर से निर्माण कार्य पर किसी प्रकार की रोक नहीं है। अनुमति दी जा चुकी है। काम शुरू नहीं होने के कारणों की जानकारी विभाग के पास नहीं है।
-विनीत मंगल, रेंजर, सेटल डेम रेंज
पुलिया निर्माण कार्य फिलहाल टेंडर प्रक्रिया में आ रही तकनीकी दिक्कतों के कारण शुरू नहीं हो सका है। प्रक्रिया पूरी होते ही निर्माण कार्य प्रारंभ कराने के प्रयास किए जाएंगे।
- विनोद मल्होत्रा, अतिरिक्त जिला कलक्टर, चित्तौड़गढ़

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