अशोक गहलोत ने भाजपा सरकार पर साधा निशाना, कहा- वन स्टेट वन इलेक्शन के बहाने चुनाव टालने का प्रयास
पंचायतों का कार्यकाल पाँच वर्ष का होगा और समय पर चुनाव अनिवार्य
अशोक गहलोत ने निकाय पंचायत चुनाव में देरी के मुद्दे पर एक बार फिर भाजपा सरकार पर निशाना साधा। गहलोत ने कहा है कि भाजपा सरकार की अलोकतांत्रिक सोच के कारण राजस्थान में संवैधानिक संकट गहराता जा रहा है।
जयपुर। पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने निकाय पंचायत चुनाव में देरी के मुद्दे पर एक बार फिर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। गहलोत ने कहा है कि भाजपा सरकार की अलोकतांत्रिक सोच के कारण राजस्थान में संवैधानिक संकट गहराता जा रहा है। पंचायतों और नगरीय निकायों में एक वर्ष से अधिक समय से चुनाव नहीं कराए जाना, और उनकी जगह सरकारी प्रशासकों की नियुक्ति, यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा प्रहार है। संविधान का अनुच्छेद 243ई स्पष्ट करता है कि पंचायतों का कार्यकाल पाँच वर्ष का होगा और समय पर चुनाव अनिवार्य हैं। इसी प्रकार अनुच्छेद 243यू नगरीय निकायों के लिए भी यही बाध्यता तय करता है। वहीं अनुच्छेद 243के के तहत राज्य निर्वाचन आयोग को स्वतंत्र संवैधानिक संस्था के रूप में स्थापित किया गया है, जिसकी जिम्मेदारी चुनाव कराना है।
यह किसी सरकार की इच्छा का विषय नहीं, बल्कि संविधान द्वारा निर्धारित अनिवार्य दायित्व है। इसके बावजूद, राज्य सरकार ने परिसीमन, पुनर्गठन और तथाकथित “वन स्टेट, वन इलेक्शन” जैसे बहानों के पीछे छिपकर चुनावों को टालने का प्रयास किया। जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने एक मामले में स्पष्ट रूप से कहा है कि इस प्रकार के कारण चुनाव टालने का वैध आधार नहीं हो सकते। राजस्थान उच्च न्यायालय ने फरवरी, मार्च और नवंबर 2025 में बार-बार निर्देश दिए, लेकिन सरकार ने हर बार इनकी अनदेखी की। अंततः 439 याचिकाओं पर एक साथ निर्णय देते हुए न्यायालय ने 15 अप्रैल 2026 की अंतिम समयसीमा निर्धारित की।

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