मिडिल ईस्ट संकट से महंगा हुआ बिटुमिन, राजस्थान के PWD प्रोजेक्ट्स पर बढ़ा असर
कई प्रोजेक्ट्स की लागत बढ़ गई
मिडिल ईस्ट संकट के चलते कच्चे तेल और बिटुमिन की कीमतें बढ़ने से राजस्थान की सड़क और निर्माण परियोजनाएं प्रभावित। PWD परियोजनाओं की लागत बढ़ी और कार्य गति धीमी। केंद्र ने राहत उपाय किए, राजस्थान में छोटे ठेकेदारों को पर्याप्त राहत नहीं मिली।
जयपुर। मिडिल ईस्ट में जारी संकट का असर अब राजस्थान की सड़क और निर्माण परियोजनाओं पर भी दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण बिटुमिन महंगा हो गया है, जिससे सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के कई प्रोजेक्ट्स की लागत बढ़ गई है। बढ़ती लागत और भुगतान में देरी के कारण कई परियोजनाओं की रफ्तार धीमी पड़ने लगी है।
केंद्र सरकार ने स्थिति को देखते हुए फोर्स मेज्योर लागू कर 2 से 4 महीने तक की राहत दी है। वहीं CPWD ने छोटे प्रोजेक्ट्स में भी प्राइस एस्केलेशन की छूट प्रदान की है। NHAI ने मासिक भुगतान और ताजा दरों के आधार पर लागत समायोजन लागू किया है, जबकि हरियाणा PWD ने 53 दिन की एक्सटेंशन ऑफ टाइम (EOT) और एस्केलेशन को मंजूरी दी है। इसके विपरीत राजस्थान में छोटे ठेकेदारों को अब तक पर्याप्त राहत नहीं मिल पाई है। निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतों और भुगतान संकट के चलते छोटे कॉन्ट्रैक्टर्स आर्थिक दबाव में हैं। इसका सीधा असर दिहाड़ी मजदूरों की रोजी-रोटी पर भी पड़ रहा है। निर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि संतुलित नीति जल्द नहीं बनी तो विकास कार्यों के साथ रोजगार पर भी गंभीर संकट गहरा सकता है।

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