देईखेड़ा में गहराया जल संकट : "हर घर नल" योजना फेल, लोगों को दूर-दराज से लाना पड़ रहा पानी

तीन लाख लीटर क्षमता की टंकियों के बावजूद सप्लाई बाधित

देईखेड़ा में गहराया जल संकट :
हालत यह है कि डेढ़-डेढ़ लाख लीटर क्षमता वाली दो जल टंकियां होने के बावजूद भी लोगों को नियमित और पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। सबसे अधिक परेशानी रेलवे पार स्थित चक मालिकों की बस्ती के लोगों को उठानी पड़ रही है, जहां आज तक पेयजल पाइपलाइन ही नहीं पहुंच सकी है।

देईखेड़ा। क्षेत्र के प्रमुख कस्बे देईखेड़ा में इन दिनों पेयजल संकट गहराता जा रहा है। करीब 5 हजार की आबादी वाले इस कस्बे में सरकार की ह्लहर घर नलह्व योजना के दावे जमीनी स्तर पर पूरी तरह विफल नजर आ रहे हैं। हालत यह है कि डेढ़-डेढ़ लाख लीटर क्षमता वाली दो जल टंकियां होने के बावजूद भी लोगों को नियमित और पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। सबसे अधिक परेशानी रेलवे पार स्थित चक मालिकों की बस्ती के लोगों को उठानी पड़ रही है, जहां आज तक पेयजल पाइपलाइन ही नहीं पहुंच सकी है। इसके अलावा रेलवे कॉलोनी, रूप नगर, महादेव जी की बस्ती और देवनारायण मंदिर क्षेत्र सहित कई मोहल्लों में पानी का दबाव बेहद कम होने से सप्लाई बाधित रहती है।

भीषण गर्मी के बीच हालात और बिगड़ गए हैं। कई क्षेत्रों में लोगों को दूर-दराज से पानी लाना पड़ रहा है, जिससे दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा समस्या के समाधान को लेकर कोई ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।

समाधान की आस में जनता
अधिकारियों के दावे अपनी जगह हैं, लेकिन जमीनी स्थिति जस की तस बनी हुई है। कस्बेवासी लंबे समय से स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक राहत नहीं मिली है। ऐसे में सवाल बना हुआ है कि आखिर कब तक देईखेड़ा वासियों को पर्याप्त पेयजल उपलब्ध हो सकेगा।

कस्बे में दो टंकियां होने पर भी पर्याप्त पेयजल उपलब्ध नहीं हो रहा है।  स्थानीय प्रसासन का समस्या की गम्भीरता पर ध्यान नहीं दे रहा है ओर सरकार के दावे फेल नजर आ रहे है। जबकि अब मई जून में पानी की डिमांड बढ़ जाएगी। 
 -दिनेश व्यास देईखेड़ा व्यापार मंडल अध्यक्ष

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कस्बे के उच्च जलाशयों (टंकियों) को भरने के लिए चार बोरिंग हैं, लेकिन वर्तमान में केवल दो ही संचालित हैं। इसके कारण टंकियां पूरी तरह नहीं भर पातीं और जलदाब कम रहता है।  जिन बस्तियों में पाइपलाइन नहीं है, वहां ईआरसीपी परियोजना के तहत पेयजल उपलब्ध कराने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।
- महावीर कुमावत,कनिष्ठ अभियंता,जलदाय विभाग लाखेरी  

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सर्दियों में जल की खपत कम थी, लेकिन गर्मियों में मांग बढ़ने से समस्या बढ़ी है। पहले से दो बोरिंग चालू थे और बुधवार से तीसरा बोरिंग भी शुरू कर दिया जाएगा जिससे जलदाब की समस्या में सुधार होने की उम्मीद है। साथ ही नई पाइपलाइन बिछाने का प्रावधान भी ईआरसीपी परियोजना के तहत पस्तावित है। 
- राहुल पारीक,पंचायत सचिव 

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