विश्व तंबाकू निषेध दिवस आज: विशेषज्ञों ने युवाओं में तंबाकू के बढ़ते सेवन पर जताई चिंता ; राजस्थान में तंबाकू सेवन से हर दिन 211 लोगों की मौत, ‘वेपिंग’ के कारण भी युवाओं की सेहत पर मंडरा रहा गंभीर संकट
राजस्थान में तंबाकू का जानलेवा कहर
जयपुर। राजस्थान में तंबाकू और धूम्रपान उत्पादों के सेवन से होने वाली बीमारियां लगातार जानलेवा साबित हो रही हैं। ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 211 लोग तंबाकू जनित रोगों के कारण असामयिक मृत्यु का शिकार हो रहे हैं, जबकि वर्षभर में यह संख्या करीब 77 हजार तक पहुंच जाती है। वैश्विक स्तर पर हर साल 70 लाख से अधिक और भारत में लगभग 13.5 लाख लोगों की मौत तंबाकू सेवन से जुड़ी बीमारियों के कारण होती है। सर्वे के अनुसार प्रदेश में प्रतिदिन 300 से अधिक बच्चे और देशभर में करीब 5500 बच्चे तंबाकू उत्पादों का सेवन शुरू कर रहे हैं। राजस्थान में वर्तमान समय में 24.7 प्रतिशत लोग किसी न किसी रूप में तंबाकू उत्पादों का उपयोग करते हैं। इनमें 13.2 प्रतिशत लोग धूम्रपान करते हैं, जबकि 14.1 प्रतिशत लोग चबाने वाले तंबाकू उत्पादों का सेवन करते हैं।
युवाओं में बढ़ रहा वेपिंग का चलन
तंबाकू सेवन के साथ ही युवाओं और किशोरों में वेपिंग यानी ई-सिगरेट या वेप पेन जैसे उपकरणों के माध्यम से धूम्रपान करना काफी प्रचलन में है। एसएमएस अस्पताल जयपुर के ईएनटी विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. पवन सिंघल ने बताया कि तंबाकू कंपनियां इन उत्पादों को फैशन और आधुनिक जीवनशैली के रूप में प्रस्तुत करती हैं, जिससे युवा प्रभावित होकर इसकी गिरफ्त में आ जाते हैं। ई-सिगरेट जैसे आधुनिक निकोटीन उत्पादों के खतरों के प्रति भी युवाओं को जागरूक किया जाना बेहद जरूरी है।
इसलिए खतरनाक है तंबाकू
डॉ. सिंघल ने बताया कि तंबाकू का सेवन मुंह, जीभ, गले और पेट के कैंसर का प्रमुख कारण माना जाता है। इसके अतिरिक्त यह उच्च रक्तचाप, हृदयाघात, फेफड़ों की गंभीर बीमारियों, सीओपीडी, एम्फीसेमा और स्ट्रोक जैसी जानलेवा स्थितियों का भी कारण बनता है।
ब्रेन के रिवॉर्ड सिस्टम पर पड़ता है गंभीर असर
भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर जयपुर की साइको-ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. प्रियसी सुरोलिया ने बताया कि निकोटिन धीरे-धीरे मस्तिष्क के रिवॉर्ड सिस्टम पर प्रभाव डालता है और निर्भरता पैदा करता है। तंबाकू के सेवन पर हजारों जहरीले रसायन निकलते हैं, जिनमें टार और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसे तत्व शामिल हैं जो शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे में निकोटिन रिप्लेसमेंट थेरेपी धूम्रपान छोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसमें नियंत्रित मात्रा में फार्मास्यूटिकल-ग्रेड निकोटिन दिया जाता है, लेकिन सिगरेट या बीड़ी में मौजूद हानिकारक तत्व इसमें नहीं होते। धूम्रपान छोड़ने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए यह एक सुरक्षित विकल्प माना जाता है।

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