ईरान की कूटनीतिक पहल: आईएईए निरीक्षकों को मंज़ूरी देने से किया इनकार, अमेरिकी उपराष्ट्रपति के बयान का किया खंड़न

परमाणु निरीक्षण और मिसाइल चर्चा से इनकार

ईरान की कूटनीतिक पहल: आईएईए निरीक्षकों को मंज़ूरी देने से किया इनकार, अमेरिकी उपराष्ट्रपति के बयान का किया खंड़न
ईरान ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के उस दावे को खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि ईरान आईएईए निरीक्षकों की वापसी पर सहमत हो गया है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि स्विट्जरलैंड वार्ता में मिसाइल क्षमता पर कोई चर्चा नहीं हुई। हालांकि, अमेरिका ने 60 दिनों के लिए प्रतिबंधों में ढील दी है।

तेहरान। ईरान ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के उस बयान का खंडन किया है कि उसने अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरीक्षकों (आईएईए) को देश में आने पर सहमति दे दी है। वेंस ने दावा किया था कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी विवाद को खत्म करने के लिए अंतिम समझौते पर पहुंचने के लिए हुई बातचीत के पहले दौर के बाद ईरान ने इस आशय की सहमति दी है। स्विट्जरलैंड के रिसॉर्ट बर्गेनस्टॉक में हुई बातचीत दोनों पक्षों के बीच एक अहम कूटनीतिक पहल थी।

बातचीत के बाद वेंस ने कहा कि निरीक्षकों की वापसी को लेकर आईएईए के साथ बातचीत आज ही शुरू हो सकती है। उन्होंने इस बैठक को भविष्य की प्रगति के लिए बहुत अच्छा नींव करार दिया था। ईरान के विदेश मंत्रालय ने हालांकि, इस दावे को तुरंत खारिज कर दिया। ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि स्विट्जरलैंड में अमेरिका के साथ बातचीत में ईरान की मिसाइल क्षमताओं पर कोई चर्चा नहीं हुई है और उसने परमाणु संयंत्रों का निरीक्षण करने के लिए आईएईए के निरीक्षकों को अनुमति देने से इनकार कर दिया।

प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि ईरान ने परमाणु निरीक्षणों को लेकर कोई नया वादा नहीं किया है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निरीक्षकों के साथ कोई भी सहयोग, ईरान की संसद और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद द्वारा बनाए गए मौजूदा कानूनी एवं संस्थागत संरचनाओं के अंतर्गत सख्ती से जारी रहेगा। निरीक्षण को लेकर यह मतभेद अमेरिका, ईरान, कतर और पाकिस्तान से जुड़ी व्यापक कूटनीतिक गतिविधियों के बीच सामने आया है।

मध्यस्थता करने वाले देशों ने एक संयुक्त बयान में कहा था कि बातचीत के शुरुआती दौर के बाद अमेरिका और ईरान दोनों ही 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए एक योजना पर सहमत हो गए हैं। कूटनीतिक घटनाक्रम के साथ-साथ अमेरिका ने अपनी नीति में एक बड़ा बदलाव करते हुए ईरान पर लगे प्रतिबंधों में कुछ समय के लिए ढील दी है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने 60 दिनों के लिए प्रतिबंधों में छूट दी है जिससे ईरान दशकों में पहली बार अमेरिकी डॉलर में तेल बेच सकेगा।

Read More ट्रंप के ‘इकोनॉमिक डी-डे’ पर ईरान का पलटवार, विदेश मंत्री बोले- अमेरिका को मिलेगी और बड़ी हार, बढ़ेगा विरोध 

इस छूट से लंबे समय से चले आ रहे अमेरिकी प्रतिबंधों में कुछ समय के लिए छूट मिली है जिससे 21 अगस्त तक ईरान के लिए कच्चा तेल और पेट्रोकेमिकल का निर्यात, बिक्री एवं परिवहन करना संभव हो गया है। इससे ईरानी तेल को सीधे अमेरिका में आयात करने की भी इजाज़त मिली है और उन अंतर्राष्ट्रीय बैंकिंग, इंश्योरेंस एवं नौवहन चैनलों तक पहुंच फिर से बहाल हुई है जिन पर पहले बहुत ज़्यादा पाबंदियां थीं।

Read More पीएम मोदी ने दी हिचिलेमा को दोबारा ज़ाम्बिया के राष्ट्रपति चुने जाने पर बधाई, द्विपक्षीय साझेदारी को मजबूती

अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि ईरान से प्राप्त वादों के बदले प्रतिबंधों में ढील दी गई। इन वादों में रणनीतिक तौर पर अहम होर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा बनाए रखना और आईएईए निरीक्षकों की वापसी की इजाज़त देना शामिल है। उन्होंने अहम समुद्री रास्ते को फिर से खोलना और परमाणु पारदर्शिता को समझौते की मुख्य शर्तें कहा। उपराष्ट्रपति वेंस ने यह भी संकेत दिया कि बातचीत परमाणु मुद्दे से आगे बढ़कर क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं तक भी हुई जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की संभावित व्यवस्था और क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए समन्वय तंत्र जैसे विषय शामिल थे।

Read More होर्मुज पर ट्रंप की दादागिरी! बोले- ‘यह अमेरिकी इलाका है’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सोशल मीडिया पर कहा कि ईरान मुख्य हथियारों के निरीक्षण की इजाज़त देने पर सहमत हो जाएगा। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने इस बात को सख्ती से खारिज कर दिया और दोहराया कि निरीक्षण के लिए किसी नई व्यवस्था पर सहमति नहीं बनी है। गौरतलब है कि ईरान और दुनिया की बड़ी शक्तियां अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, रूस और चीन के बीच 2015 में हुए परमाणु समझौते हुआ था। 2015 के इस समझौते के तहत आईएईए को ईरान के परमाणु संयंत्रों का निरीक्षण करने की इजाज़त थी लेकिन 2018 में राष्ट्रपति ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान अमेरिका ने इसे खराब समझौता बताते हुए खुद को इससे अलग कर लिया।

फरवरी 2026 में इज़रायल और अमेरिका के साथ हुए 12 दिनों के टकराव के दौरान ईरान के परमाणु ठिकानों पर सैन्य हमले हुए। इसके बाद ईरान ने आईएईए निरीक्षकों की पहुंच पर रोक लगा दी और बाद में एजेंसी ने देश से अपने बाकी कर्मचारियों को वापस बुला लिया।

Related Posts

Post Comment

Comment List

Latest News

सीएचसी हतूण्डी में रक्तदान शिविर, 73 यूनिट रक्त संग्रहित; गर्भवती महिलाओं और मरीजों को मिलेगा लाभ सीएचसी हतूण्डी में रक्तदान शिविर, 73 यूनिट रक्त संग्रहित; गर्भवती महिलाओं और मरीजों को मिलेगा लाभ
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) हतूण्डी में आयोजित स्वैच्छिक रक्तदान शिविर में क्षेत्रवासियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। शिविर में कुल 73...
पांच करोड़ रिश्वत के आरोपों पर भाजपा का आप सरकार पर हमला, परमजीत कैथ बोले- सच्चाई जानना चाहती है जनता 
NDA में ऑल इंडिया तीसरी रैंक से NHAI में उप प्रबंधक तक, प्रदीप चारण ने सफलता की नई मिसाल कायम की
तेजस्वी यादव ने जेल में 19 वर्षीय रोशन यादव की मौत पर उठाए सवाल, NHRC से स्वतंत्र जांच और न्याय की मांग की
बांध में आपत्तिजनक स्थिति में नहाने का वीडियो वायरल: अलवर के प्रधानाचार्य पर शिक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई, विभागीय जांच के आदेश
जयपुर-यामानाशी ज्वैलरी एसोसिएशन मिलकर बढ़ाएं कारोबार और रोजगार : मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा
सीएम ने ली बैठक :  त्योहारों पर सुरक्षा में नहीं रहे कोई चूक, प्रभावी कार्ययोजना से संभालें व्यवस्था