डीजीपी आकर बताएं कि लापता नाबालिगों की बरामदगी के लिए क्या है नीति: हाईकोर्ट
नामजद युवक के परिजनों के बयान दर्ज किए
अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि किशोरी गत 5 फरवरी से लापता है और पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग किशोरी के लापता होने के एक माह तक पुलिस की ओर से किसी तरह का अनुसंधान नहीं करने पर नाराजगी जताई है। इसके साथ ही अदालत ने मामले में पुलिस महानिदेशक को 7 अप्रैल को तलब किया है। अदालत ने डीजीपी से पूछा है कि लापता हुए नाबालिगों की बरामदगी के लिए पुलिस की क्या नीति हैं। जस्टिस इन्द्रजीत सिंह और जस्टिस मुकेश राजपुरोहित की खंडपीठ ने यह आदेश देवलाल गुर्जर की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। सुनवाई के दौरान अदालती आदेश की पालना में डीसीपी पूर्व तेजस्विनी गौतम अदालत में पेश हुई। उनकी ओर से प्रकरण की तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश कर मामले में की जा रही पुलिस की जांच से अदालत को अवगत कराया गया।
इस पर अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि किशोरी गत 5 फरवरी से लापता है और पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। यहां तक की पुलिस ने मामले में आरोपी बनाए गए युवक के परिजनों के बयान भी हाईकोर्ट की ओर से नोटिस जारी करने के बाद लिए। पूर्व में भी अन्य मामलों में पुलिस की ऐसी कार्य प्रणाली सामने आ चुकी है। ऐसे में डीजीपी अदालत में पेश होकर इस संबंध में जानकारी दे। याचिका में अधिवक्ता नरेन्द्र सिंह गुर्जर ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता की पन्द्रह साल की बेटी गत पांच फरवरी से लापता है। उसने एक युवक को नामजद करते हुए प्रताप नगर थाना पुलिस में रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। इसके बावजूद पुलिस ने मामले में अनुसंधान ही शुरू नहीं किया। यहां तक की अदालत की ओर से गत माह पुलिस को नोटिस जारी करने के बाद जांच अधिकारी ने नामजद युवक के परिजनों के बयान दर्ज किए। ऐसे में पुलिस को निर्देश दिए जाए कि वह लापता की तलाश कर उसे अदालत में पेश करें।
Comment List