साइबर ठगी का मामला : तकनीक से आगे निकल रहे अपराधी, लोकेशन ट्रेसिंग घटी
साइबर ठग बदल रहे तरीके
देशभर में साइबर ठगी तेजी से बढ़ रही है, जबकि ट्रेसिंग तकनीक अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही। आई4सी का प्रतिबिम्ब पोर्टल संदिग्ध नंबरों की लोकेशन देता है, फिर भी अपराध बढ़े हैं। ठग नए तरीके अपना रहे हैं, जिससे जांच मुश्किल हो गई। सरकार सख्ती बढ़ाने की तैयारी में है, वहीं पुलिस नई तकनीक से कार्रवाई कर रही है।
जयपुर। देशभर में साइबर ठगी लगातार बढ़ रही है, जबकि अपराधियों को पकड़ने के लिए इस्तेमाल हो रही तकनीकी अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही है। केन्द्र सरकार के इंडियन साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर (आई4सी) की ओर से शुरू किया गया प्रतिबिम्ब पोर्टल भले ही संदिग्ध नंबरों की रियल-टाइम लोकेशन उपलब्ध करा रहा हो, इसके बावजूद ठगी की घटनाओं में तेज वृद्धि चिंता का विषय बन गई है। आंकड़े बताते हैं कि जहां ठगों की लोकेशन ट्रेसिंग में गिरावट आई है, वहीं आपत्तियों में उछाल दर्ज किया गया है।
साइबर अपराधियों की ओर से अपनाए जा रहे नए-नए तकनीकी तरीकों ने पुलिस और जांच एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफार्म के बढ़ते उपयोग के साथ ठगी के तरीके भी अधिक जटिल और संगठित हो गए हैं। यही वजह है कि अपराधियों के ठिकानों का पता लगाना अब पहले से ज्यादा मुश्किल हो गया है।
साइबर ठग बदल रहे तरीके
ये सभी नंबर ऐसे होते हैं, जिनके खिलाफ देश के किसी भी हिस्से में साइबर ठगी की आपत्ति दर्ज हो चुकी होती हैं। इसके बावजूद आंकड़े यह संकेत देते हैं कि अपराधी तेजी से अपने तरीके बदल रहे हैं।
सरकार की सख्त तैयारी
सरकार अब इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स पर सख्ती बढ़ाने की तैयारी में है। आने वाले समय में डिजिटल प्लेटफार्म्स की निगरानी और जवाबदेही को और मजबूत किया जा सकता है, ताकि ठगों के नेटवर्क को समय रहते तोड़ा जा सके।
इनका कहना है
जयपुर रेंज के कई जिलों में साइबर ठगी के कुछ प्रमुख हॉट स्पॉट सामने आए हैं। इन इलाकों में पुलिस कई बार छापेमारी कर ठगों को गिरफ्तार भी कर चुकी है। हालाकि साइबर अपराधी लगातार अपने तरीके बदल रहे हैं, लेकिन पुलिस भी नई तकनीकों की मदद से उन्हें ट्रैक कर कार्रवाई कर रही है।
- - राहुल प्रकाश, जयपुर रेंज आईजी

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