रणथम्भोर में ‘प्रोजेक्ट कैराकल’ की शुरुआत : दुर्लभ जंगली बिल्ली के संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम, पारिस्थितिकी और जनसंख्या रुझानों पर विस्तृत चर्चा

टाइगर वॉच जैसे संस्थानों का सहयोग भी शामिल

रणथम्भोर में ‘प्रोजेक्ट कैराकल’ की शुरुआत : दुर्लभ जंगली बिल्ली के संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम, पारिस्थितिकी और जनसंख्या रुझानों पर विस्तृत चर्चा

राजस्थान वन विभाग ने Ranthambore Tiger Reserve में ‘कैराकल संरक्षण कार्यशाला’ का आयोजन करते हुए ‘प्रोजेक्ट कैराकल’ का औपचारिक शुभारंभ। इस कार्यशाला में वरिष्ठ वन अधिकारी, वन्यजीव विशेषज्ञ, शोधकर्ता और संरक्षण से जुड़े संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

जयपुर। राजस्थान वन विभाग ने Ranthambore Tiger Reserve में ‘कैराकल संरक्षण कार्यशाला’ का आयोजन करते हुए ‘प्रोजेक्ट कैराकल’ का औपचारिक शुभारंभ किया। इस कार्यशाला में वरिष्ठ वन अधिकारी, वन्यजीव विशेषज्ञ, शोधकर्ता और संरक्षण से जुड़े संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में Wildlife Institute of India के निदेशक डॉ. जी.एस. भारद्वाज और मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के.सी.ए. अरुण प्रसाद सहित कई विशेषज्ञ मौजूद रहे। साथ ही डॉ. शोमिता मुखर्जी, डॉ. अयान साधु और डॉ. धमेन्द्र खंडाल जैसे विशेषज्ञों ने भी अपने विचार साझा किए। इस कार्यशाला का मुख्य फोकस एशियाई कैराकल के संरक्षण पर रहा। कैराकल एक दुर्लभ और कम दिखाई देने वाली जंगली बिल्ली है, जो पहले राजस्थान के शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में पाई जाती थी। लेकिन आवास क्षरण, क्षेत्रीय विखंडन और शिकार की कमी के कारण इसकी संख्या में तेजी से गिरावट आई है, जिससे इसके संरक्षण की आवश्यकता और बढ़ गई है।

कार्यशाला में कैराकल की वर्तमान स्थिति, वितरण और उपलब्ध आंकड़ों की समीक्षा की गई। साथ ही इसके आवास, पारिस्थितिकी और जनसंख्या रुझानों पर विस्तृत चर्चा हुई। ‘प्रोजेक्ट कैराकल’ के तहत राज्य में इसकी स्थिति का आकलन, महत्वपूर्ण आवासों की पहचान, निगरानी और अनुसंधान को मजबूत बनाने तथा स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने रणथम्भोर, मुकुन्दरा हिल्स और रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व जैसे क्षेत्रों में संरक्षण की चुनौतियों और समाधान पर भी पर भी विचार-विमर्श किया। इस परियोजना में SACON और टाइगर वॉच जैसे संस्थानों का सहयोग भी शामिल है। 

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