शाहपुरा के आकाश का कमाल : दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर फहराया तिरंगा, हर कदम के साथ शरीर देने लगा जवाब
सांसों पर दबाव बढ़ता गया
आकाश के इस अभियान के शुरू होने के अगले ही दिन मौसम ने करवट ली और बर्फबारी का सिलसिला शुरू हो गया। जैसे-जैसे ऊंचाई बढ़ती गई, सांसों पर दबाव बढ़ता गया।
शाहपुरा। कस्बे के युवा पर्वतारोही आकाश लोढ़ा ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट के दक्षिणी (नेपाल) बेस कैंप पर पहुंचकर 17598 फीट (5364 मीटर) की ऊंचाई पर तिरंगा फहराया और इतिहास रच दिया। बफीर्ली हवाओं, माइनस तापमान और ऑक्सीजन की कमी से जूझते हुए आकाश ने वह कर दिखाया, जो साहस, धैर्य और दृढ़ इच्छाशक्ति का जीवंत उदाहरण बन गया है। जानकारी अनुसार आकाश वर्तमान में मल्टीनेशनल कंपनी में बैंगलोर में कार्यरत है। आकाश के इस अभियान के शुरू होने के अगले ही दिन मौसम ने करवट ली और बर्फबारी का सिलसिला शुरू हो गया। जैसे-जैसे ऊंचाई बढ़ती गई, सांसों पर दबाव बढ़ता गया।
हर कदम के साथ शरीर जवाब देने लगा, लेकिन मन ने हार मानने से इनकार कर दिया। आठ दिन की कठिन यात्रा, लगातार बफीर्ली हवाएं और जमा देने वाली ठंड के बीच आखिरकार वह पल आया, जब आकाश एवरेस्ट बेस कैंप पहुंचे और तिरंगे को हवा में लहराते देख सुकून और गर्व से भर उठे। आकाश के पिता समाजसेवी व व्यवसायी अनिल लोढ़ा में बताया कि करीब 130 किलोमीटर लंबी ट्रैकिंग इस अभियान का सबसे बड़ा इम्तिहान थी।
रास्ते में कई बार ऑक्सीजन की कमी महसूस हुई। तापमान कभी माइनस 7 तो बेस कैंप पहुंचते-पहुंचते माइनस 22 डिग्री तक जा पहुंचा। खाने-पीने के नाम पर चॉकलेट, ड्राईफ्रूट और फल ही सहारा बने, जिनसे शरीर को ऊर्जा मिलती रही। ठंड इतनी तीखी थी कि स्किन बर्न हो गई, मुंह का स्वाद चला गया और हल्का बुखार भी चढ़ आया, लेकिन आकाश का हौसला नहीं डगमगाया।
अंतिम दिन की चढ़ाई कठिन साबित : अंतिम दिन 28 दिसम्बर की चढ़ाई सबसे कठिन साबित हुई। सुबह 8 बजे गोरखशेप से केवल आधा किलोमीटर का रास्ता तय करना था, लेकिन यह आधा किलोमीटर पत्थरों, बर्फ और तेज हवाओं के बीच किसी युद्ध से कम नहीं था। तीन घंटे की जद्दोजहद के बाद सुबह 11 बजे आकाश ने एवरेस्ट बेस कैंप पर कदम रखा और तिरंगा फहराकर शाहपुरा का नाम दुनिया की ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया।

Comment List