बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं को गति देने के लिए एमओयू, वर्तमान में 200 से अधिक उद्योग
पहल के माध्यम से कौशल विकास एवं क्षमता निर्माण को बढ़ावा
भविष्य में ऊर्जा भंडारण और राजस्थान के ऊर्जा क्षेत्र को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार के ऊर्जा विभाग ने इंडिया एनर्जी स्टोरेज एलायंस के साथ एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए। आईईएसए एक प्रमुख औद्योगिक गठबंधन है, जो भारत में उन्नत ऊर्जा भंडारण, ग्रीन हाइड्रोजन, ई-मोबिलिटी तकनीकों तथा क्षमता निर्माण के विकास की दिशा में कार्यरत है। वर्तमान में ऊर्जा क्षेत्र के 200 से अधिक उद्योग, औद्योगिक समूह सहित अन्य हितधारक इससे जुड़े हैं।
जयपुर। भविष्य में ऊर्जा भंडारण (एनर्जी स्टोरेज) और राजस्थान के ऊर्जा क्षेत्र को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार के ऊर्जा विभाग ने इंडिया एनर्जी स्टोरेज एलायंस के साथ एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए। विद्युत भवन के बोर्ड रूम में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रमुख शासन सचिव ऊर्जा अजिताभ शर्मा, राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम के सीएमडी रोहित गुप्ता, राजस्थान ऊर्जा विकास निगम के प्रबंध निदेशक ओम कसेरा सहित विभिन्न विद्युत निगमों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। एमओयू पर संयुक्त सचिव, ऊर्जा सौरभ स्वामी तथा इंडिया एनर्जी स्टोरेज एलायंस के प्रेसिडेंट देबमाल्या सेन ने हस्ताक्षर किए। आईईएसए एक प्रमुख औद्योगिक गठबंधन है, जो भारत में उन्नत ऊर्जा भंडारण, ग्रीन हाइड्रोजन, ई-मोबिलिटी तकनीकों तथा क्षमता निर्माण के विकास की दिशा में कार्यरत है। वर्तमान में ऊर्जा क्षेत्र के 200 से अधिक उद्योग, औद्योगिक समूह सहित अन्य हितधारक इससे जुड़े हैं।
कार्यक्रम के दौरान प्रमुख शासन सचिव, ऊर्जा, अजिताभ शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान 6 हजार मेगावाट ऑवर बैटरी ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। निर्माणाधीन पूगल सोलर पार्क में एक ही स्थान पर देश की सबसे बड़ी ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने की दिशा में अग्रसर है। इंडिया एनर्जी स्टोरेज अलायंस के साथ यह सहयोग राजस्थान को देश में ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं के क्षेत्र में अग्रणी बनाने में सहायक सिद्ध होगा। एलायंस प्रेसिडेंट देबमाल्या सेन ने बताया कि यह भागीदारी नवीकरणीय ऊर्जा के विकास, ग्रिड स्थिरता और निर्बाध विद्युत आपूर्ति के लिए ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के विकास को मजबूती मिलेगी। इससे राज्य में ऊर्जा भंडारण घटकों तथा ईवी सप्लाई चेन के लिए आवश्यक ईकोसिस्टम विकसित करने में भी सहायता मिलेगी। प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और ज्ञान साझा करने की पहल के माध्यम से कौशल विकास एवं क्षमता निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।

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