नीरजा मोदी स्कूल में कई खामियां : याचिका दायर करने का अधिकार भी नहीं, सीबीएसई ने कहा- कोर्ट ने टाली याचिका
निगरानी करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी
सीबीएसई की ओर से कहा गया कि स्कूल सीसीटीवी से लैस है, लेकिन उसकी निगरानी करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी। यदि सीसीटीवी की मॉनिटरिंग होती तो शायद घटना नहीं होती।
जयपुर। नीरजा मोदी स्कूल की समबद्धता वापस लेने के मामले में सीसीएसई ने हाईकोर्ट में अपना जवाब पेश कर दिया है। हालांकि जवाब रिकॉर्ड पर नहीं आने के चलते जस्टिस बिपिन गुप्ता की एकलपीठ ने नीरजा मोदी स्कूल की याचिका पर सुनवाई टाल दी। सीबीएसई की ओर से अधिवक्ता एमएस राघव ने हाईकोर्ट में जवाब पेश कहा कि स्कूल प्रशासन को सीधे हाईकोर्ट में याचिका पेश करने का अधिकार नहीं है। इसके लिए सीबीएसई चेयरमैन के समक्ष अपील पेश करनी चाहिए थी। सीबीएसई की ओर से घटना के बाद दो सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया। जिसकी रिपोर्ट में कई तरह की गंभीर खामियां सामने आई है। स्कूल के बच्चे आईडी कार्ड नहीं लगाते। जिससे घटना के आधा घंटा बाद तक यह पता नहीं चला कि चौथी मंजिल से कूदने वाली छात्रा कौन थी। इसके अलावा इमारत पर सेफ्टी नेट भी नहीं था। इसके होने से घटना रोकी जा सकती थी।
सीबीएसई की ओर से कहा गया कि स्कूल सीसीटीवी से लैस है, लेकिन उसकी निगरानी करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी। यदि सीसीटीवी की मॉनिटरिंग होती तो शायद घटना नहीं होती। स्कूल में एंटी बुलिंग सहित अन्य कमेटी केवल कागजों में ही काम कर रही थी। मृतका लंबे समय से बुलिंग की शिकार हो रही थी, लेकिन शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। सीबीएसई ने आंकड़े पेश कर कहा कि बीते छह साल में करीब ढाई हजार विद्यार्थियों ने आत्महत्या की है। गौरतलब है कि स्कूल प्रशासन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सीबीएसई की ओर से स्कूल की कक्षा 9 से 12 तक की समबद्धता को रद्द करने को चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने गत 17 जनवरी को मामले में सीबीएसई सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था।

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