40-50 की उम्र में घुटने बदलने की जरूरत नहीं, एच टी ओ तकनीक बचा सकती है प्राकृतिक घुटना
वजन को सही जगह शिफ्ट करना है तकनीक का आधार
40 से 50 वर्ष की उम्र में ही लोगों के घुटनों में दर्द शुरू हो जाता है और पैर अंदर की तरफ मुड़ने लगते। मरीज को लगता है कि अब नी रिप्लेसमेंट ही एकमात्र रास्ता बचा है। लेकिन यह धारणा गलत। ऑर्थोपेडिक सर्जन एवं जोड़ प्रत्यारोपण विशेषज्ञ डॉ. आशीष राणा गोयल बताते हैं कि कम उम्र के और सक्रिय मरीजों के लिए रिप्लेसमेंट के बजाय हाई टिबियल ऑस्टियोटॉमी एक बेहतर विकल्प है, जिससे नेचुरल घुटने को 10-15 साल तक बचाया जा सकता।
जयपुर। अक्सर 40 से 50 वर्ष की उम्र में ही लोगों के घुटनों में दर्द शुरू हो जाता है और पैर अंदर की तरफ मुड़ने लगते हैं। मरीज को लगता है कि अब नी रिप्लेसमेंट ही एकमात्र रास्ता बचा है। लेकिन यह धारणा गलत है। ऑर्थोपेडिक सर्जन एवं जोड़ प्रत्यारोपण विशेषज्ञ डॉ. आशीष राणा गोयल बताते हैं कि कम उम्र के और सक्रिय मरीजों के लिए रिप्लेसमेंट के बजाय हाई टिबियल ऑस्टियोटॉमी एक बेहतर विकल्प है, जिससे नेचुरल घुटने को 10-15 साल तक बचाया जा सकता है।
वजन को सही जगह शिफ्ट करना है तकनीक का आधार: डॉ. गोयल बताते हैं कि शुरुआती आर्थराइटिस में घुटना पूरा खराब नहीं होता, बल्कि उसका सिर्फ एक हिस्सा (अंदरूनी भाग) घिसता है, जिससे पैर टेढ़ा हो जाता है। एचटीओ सर्जरी में घुटने को बदला नहीं जाता, बल्कि टांग की हड्डी टिबिया को हल्का सा सीधा व अलाइन किया जाता है। इससे शरीर का वजन घिसे हुए हिस्से से हटकर घुटने के स्वस्थ हिस्से पर चला जाता है जिससे आर्थराइटिस को बढ़ने से रोका जा सकता है।
प्राकृतिक जोड़ बचाना बनाएं प्राथमिकता: रिप्लेसमेंट के बाद दौड़ना या भारी काम करना मुश्किल होता है, लेकिन एचटीओ के बाद मरीज पालथी मार सकता है, दौड़ सकता है और भारी काम भी कर सकता है। यह सर्जरी मरीज को अपना नेचुरल जॉइंट बचाए रखने का मौका देती है, जो किसी भी कृत्रिम इम्प्लांट से बेहतर है। मरीज को सबसे पहले अपने प्राकृतिक जोड़ों को बचाने का ही प्रयास करना चाहिए, प्रत्यारोपण के लिए बाद में सोचा जा सकता है। ऐसा नहीं है कि एचटीओ के बाद नी रिप्लेसमेंट नहीं कर सकते।

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