चंबल नदी उफान पर: पालीघाट पर 22 सेमी बढ़ा जलस्तर, झरेल बालाजी पुलिया पर आधा फीट पानी, राहगीर जान जोखिम में डालकर कर रहे आवागमन।
चंबल का जलस्तर बढ़ने से झरेल बालाजी पुलिया जलमग्न
कोटा बैराज से पानी छोड़े जाने के कारण चंबल नदी का जलस्तर 22 सेंटीमीटर बढ़ गया है। झरेल बालाजी पुलिया डूबने के बावजूद लोग जान जोखिम में डालकर नदी पार कर रहे हैं।
सवाईमाधोपुर। कस्बे से करीब 8 किलोमीटर दूर पालीघाट पर चंबल नदी का जलस्तर बीते दो दिनों में 22 सेंटीमीटर तक बढ़ गया है। इसके चलते झरेल बालाजी की निचले स्तर की पुलिया पूरी तरह पानी में डूब गई है और पुलिया के ऊपर से करीब आधा फीट से अधिक पानी की चादर बह रही है। इसके बावजूद राहगीर, श्रद्धालु और वाहन चालक जान जोखिम में डालकर इस पुलिया को पार कर रहे हैं।
बुधवार देर रात चंबल नदी में 10 सेंटीमीटर जलस्तर बढ़ा, जबकि गुरुवार को इसमें 12 सेंटीमीटर की और बढ़ोतरी दर्ज की गई। जलस्तर बढ़ने का मुख्य कारण कोटा बैराज से करीब 5 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जाना तथा कोटा की नहरों का अतिरिक्त पानी चंबल नदी में आना बताया जा रहा है। हालांकि 5 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो पाई है, लेकिन नहरों से आ रहे पानी के कारण चंबल का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।
झरेल बालाजी पुलिया के क्षतिग्रस्त और ऊबड़-खाबड़ होने के कारण वाहनों के फिसलने का खतरा बना हुआ है। इसके बावजूद खंडार प्रशासन एसडीएम, तहसीलदार, पुलिस की ओर से न तो किसी प्रकार की बैरिकेडिंग की गई है और न ही राहगीरों को रोकने के लिए मौके पर कोई तैनाती की गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि खंडार प्रशासन इस गंभीर स्थिति में भी मूकदर्शक बना हुआ है।
पुलिया डूबने से ग्रामीणों को आवागमन के लिए करीब 60 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। वहीं झरेल बालाजी के दर्शनार्थियों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्र में जलस्तर और बढ़ने की संभावना को देखते हुए किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
इनका कहना...पहले चंबल नदी का जलस्तर करीब 6 मीटर था, जो नहरों का पानी आने से बढ़कर 6.22 मीटर हो गया है। यानी 22 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आने वाले समय में जलस्तर और बढ़ने की संभावना बनी हुई है।

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