चेहरे के असहनीय दर्द की गंभीर समस्या है ट्राइजेमिनल न्यूरेल्जिया : हल्के में लेना खतरनाक, चेहरे की नर्व पर होता है असर
बीमारी को दुनिया के सबसे दर्दनाक तंत्रिका विकारों में से एक माना जाता है
ट्राइजेमिनल न्यूरेल्जिया एक गंभीर तंत्रिका रोग है, जिसमें चेहरे में बिजली के झटके जैसा असहनीय दर्द होता है। एसडीएमएच के डॉ. डीपी शर्मा के अनुसार यह दर्द बोलने, खाने या ठंडी हवा से भी ट्रिगर हो सकता है। 50+ उम्र, हाई बीपी इसके जोखिम हैं। दवाओं से राहत न मिले तो सर्जरी सहित उन्नत उपचार उपलब्ध हैं।
जयपुर। ट्राइजेमिनल न्यूरेल्जिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें चेहरे को मुख्य संवेदना देने वाली नस जिसे ट्राइनेमिनल नर्व कहते है सबसे ज्यादा प्रभावित हो जाती है। यह नस चेहरे, आंखों के आस-पास, नाक, होंठ व जबड़े में महसूस होने वाली संवेदनाओं को मस्तिष्क तक पहुंचाती है। जब इस नस पर दबाव पड़ता है या कोई क्षति होती है तो चेहरे में अचानक तेज बिजली के झटके या चाकू के काटने जैसा तीव्र असहनीय दर्द होता है। एसडीएमएच अस्पताल के वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डॉ. डीपी शर्मा ने बताया कि आमतौर पर लोग चेहरे में होने वाले असामान्य व तीव्र दर्द को दांत या साइनस का दर्द समझते रहते हैं। सही समय पर पहचान और उपचार से मरीज सामान्य बीमारी शारीरिक दर्द जीवन जी सकते हैं। यह दर्द कुछ सेकंड से मिनट तक रह सकता है और दिन में कई बार हो सकता है। कभी कभी हल्की सी गतिविधि जैसे बोलना, खाना, दांत साफ करना, चेहरा धोना, ठंडी हवा लगना भी दर्द को ट्रिगर कर सकता है। इस बीमारी को दुनिया के सबसे दर्दनाक तंत्रिका विकारों में से एक माना जाता है।
यह है बीमारी की वजह
डॉ. शर्मा ने बताया कि 50 वर्ष से अधिक आयु, उच्च रक्तचाप, नसों पर रक्त वाहिकाओं का दबाव, मल्टीपल स्क्लेरोसिस जैसी बीमारी का होना इस बीमारी के सबसे ज्यादा जोखिम कारक हैं।
कैसे होती है पहचान
इस बीमारी की पहचान मरीज के लक्षणों और दर्द के पैटर्न से की जाती है। सीटी स्कैन के द्वारा नस पर किसी रक्त वाहिका के दबाव या अन्य समस्या का पता लगाया जा सकता है। उपचार: डॉ. शर्मा ने बताया कि शुरुआती चरण में डॉक्टर आमतौर पर तंत्रिका को शांत करने वाली दवाएं देते हैं, जिनसे दर्द के दौरे कम हो सकते हैं। यदि दवाओं से राहत नहीं मिलती तो आॅपरेशन कर नस पर से दबाव हटाया जाता है, जिसे माइक्रो वैस्कुलर डीकम्प्रेशन कहते हैं। अन्य तरीकों जैसे नाईफ रेडियोसर्जरी, बैलून कम्प्रेशन, राइजोटोमी से भी इस बीमारी से निजात पाया जा सकता है।

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