राज्यपाल ने कटियोर में ग्रामीणों व स्कूली बच्चों से किया संवाद, कहा- गरीबी और पिछड़ापन से मुक्ति के लिए शिक्षा सशक्त माध्यम
विकसित ग्रामों से ही विकसित भारत की संकल्पना मजबूती
राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने गुरुवार को बांसवाड़ा यात्रा के दौरान गोविन्द गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय बांसवाड़ा द्वारा विश्वविद्यालय सामाजिक उत्तरदायित्व के चतुर्थ चरण के अन्तर्गत गोद लिये ग्राम कटियोर के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में शिरकत की और ग्रामीणों व स्कूल के बच्चों से संवाद किया।
जयपुर। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने गुरुवार को बांसवाड़ा यात्रा के दौरान गोविन्द गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय बांसवाड़ा द्वारा विश्वविद्यालय सामाजिक उत्तरदायित्व के चतुर्थ चरण के अन्तर्गत गोद लिये ग्राम कटियोर के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में शिरकत की और ग्रामीणों व स्कूल के बच्चों से संवाद किया। राज्यपाल ने ग्रामीणों से सीधा संवाद कायम करते हुए ग्राम्य जनजीवन, ग्रामीणों के उत्थान के लिए हो रहे प्रयासों, बुनियादी सुविधाओं और सेवाओं तथा रहन-सहन एवं परिवेशीय पहलुओं पर आत्मीय चर्चा की। उन्होंने स्वस्थ, शिक्षित एवं सशक्त ग्राम्य शक्ति को राष्ट्रीय मजबूती का मूलाधार बताते हुए ग्रामीणों से इस दिशा में शिक्षा एवं जागरुकता के साथ आगे आने का आह्वान किया और कहा है कि विकसित ग्रामों से ही विकसित भारत की संकल्पना मजबूती से आगे बढ़ेगी।
राज्यपाल बागडे ने ग्रामीणों से जीवन को आनन्दमयी एवं सुख-समृद्धिवान बनाने के लिए शिक्षा पर सर्वाधिक जोर दिया और कहा कि इसके लिए अपने परिवार को शिक्षित बनाने पर सर्वोपरि ध्यान केन्द्रित करें। राज्यपाल ने कहा कि गरीबी और पिछड़ापन से मुक्ति के लिए शिक्षा सशक्त माध्यम है। इसे जानकर केन्द्र व राज्य सरकार शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर कार्य कर रही है, उसका पूरा-पूरा लाभ लेते हुए सम्पूर्ण शिक्षित समाज और क्षेत्र बनाएं और सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान में अपनी सहभागिता अच्छी तरह सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीणों के उत्थान व बहुआयामी विकास के लिए व्यापक पैमाने पर लाभकारी योजनाओं का संचालन कर रही है, इनका लाभ लेने के लिए जागरुकता के साथ पहल करें और पारिवारिक उन्नति पाएं। पशुपालन और डेयरी को ग्राम्य समृद्धि का मूलाधार निरूपित करते हुए राज्यपाल ने ग्रामीणों से दुग्ध व्यवसाय के विस्तार और आय के छोटे-छोटे स्रोतों को अपनाने का आह्वान किया और कहा कि जैविक खाद उत्पादन व उपयोग का भी इसमें समावेश किया जाना चाहिए। इन कार्यों से आमदनी में अभिवृद्धि के साथ ही बौद्धिक व शारीरिक क्षमता का संवर्धन भी होगा।
उन्होंने बैलों से खेती करने के लाभ गिनाते हुए ग्रामीणों से बैलों से खेती करने और अपनी जमीन को उपजाऊ बनाने के साथ ही पौष्टिक अनाज पैदा करने पर भी जोर दिया।
राज्यपाल ने गोविन्द गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. केशवसिंह ठाकुर से कहा कि वे गांव गोद लेने के साथ ग्रामीण बच्चों को भी गोद लें ताकि उन्हें भविष्य निर्माण में और अधिक सम्बल प्राप्त हो सके। उन्होंने बच्चों से भविष्य की कल्पनाओं के बारे में पूछा तथा नियमित पढ़ाई के साथ-साथ सामान्य ज्ञान और परिवेशीय, सामाजिक एवं राष्ट्रीय सरोकारों से संबंधित जानकारी में भी अपडेट रहने को कहा। इसके साथ ही पढ़ाई पूरी करने के उपरान्त प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए पूर्ण निष्ठा, लगन एवं एकाग्रता के साथ तैयारी करने पर बल दिया और कहा कि जीवन में लक्ष्य निर्धारण के अनुरूप कर्तव्य निभाने पर मेहनत का फल अवश्य प्राप्त होता है। राज्यपाल ने संवाद कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। विश्वविद्यालय सामाजिक उत्तरदायित्व के चतुर्थ चरण के अन्तर्गत बांसवाडा के दो गांव ग्राम पंचायत कटियोर व चनावाला ग्राम को गोद लिया गया है।

Comment List