ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में शहरी निकाय फेल लक्ष्य अभी दूर : आंकडों की स्थिति रोचक, कचरा संग्रहण में एक यात्री वाहन तक शामिल

दावों के बावजूद कचरा खुले डम्पिंग स्थलों पर ही पहुंच रहा

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में शहरी निकाय फेल लक्ष्य अभी दूर : आंकडों की स्थिति रोचक, कचरा संग्रहण में एक यात्री वाहन तक शामिल

शहरी विकास मंत्रालय के सेवा स्तर बेंचमार्क संकेतकों के विश्लेषण ने राज्य के शहरी निकायों की ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था की पोल खोल दी। कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण ठप। डम्पिंग स्थलों पर असंसाधित कचरे के पहाड़ खड़े। पर्यावरणीय खतरे बढ़ रहे। नियंत्रक-महालेखापरीक्षक की 2025 रिपोर्ट में यह गंभीर स्थिति उजागर।

जयपुर। शहरी विकास मंत्रालय, भारत सरकार के तय सेवा स्तर बेंचमार्क (एसएलबी) संकेतकों के विश्लेषण ने राज्य के शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) की ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था की हकीकत उजागर कर दी है। शहरों में कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण ठप, डम्पिंग स्थलों पर असंसाधित अपशिष्ट के पहाड़ और पर्यावरणीय खतरे लगातार बढ़ते जा रहे हैं। भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक का शहरी स्थानीय निकायों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर 2025 के प्रतिवेदन में ये खुलासा किया गया है।

मुख्य अनियमितताएं

  •                 63.79: तक सीधी डम्पिंग
  •                 14 यूएलबी में धर्मकांटे नहीं
  •                 12 यूएलबी में खतरनाक अपशिष्ट के लिए अलग व्यवस्था नहीं
  •                 4 यूएलबी में खरीदी गई कम्पोस्ट मशीनें बेकार
  •                 15 यूएलबी में सैनिटरी लैंडफिल का अभाव
  •                 निर्माण-विध्वंस संयंत्र सिर्फ  उदयपुर में, वह भी बंद
  •                 प्रदर्शन बनाम वास्तविक स्थिति

सूचकांक                                राज्य स्तर                     नमूना यूएलबी

अपशिष्ट प्रसंस्करण                    11 से 25%                      29 से 35%

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सीधी डम्पिंग                             63 से 79%                     65 से 71%

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धर्मकांटे की उपलब्धता                   --                           14/18 में नहीं

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सैनिटरी लैंडफिल                     सीमित                        15/18 में नहीं

अपशिष्ट प्रसंस्करण की स्थिति

राज्य स्तर पर अपशिष्ट प्रसंस्करण मात्र 11 से 25 प्रतिशत के बीच सिमटा रहा, जबकि नमूना जांच किए गए यूएलबी में यह 29 से 35 प्रतिशत तक ही पहुंच सका। इसके उलट राज्य स्तर पर 63 से 79 प्रतिशत और नमूना यूएलबी में 65 से 71 प्रतिशत तक ठोस अपशिष्ट की सीधी डम्पिंग की गई। यानी प्रसंस्करण क्षमता और दावों के बावजूद कचरा खुले डम्पिंग स्थलों पर ही पहुंच रहा है। कई जगह संग्रहण और वास्तविक संग्रहण के सूचित आंकड़ों में भी अंतर मिला, जिससे डेटा की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए हैं।

आंकड़ों में भी एकरूपता नहीं

लेखापरीक्षा में यह भी सामने आया कि निदेशक स्थानीय निकाय को दी गई अपशिष्ट उत्पादन की जानकारी और राजस्थान राज्य प्रदूषण मंडल को प्रस्तुत वार्षिक रिपोर्ट के आंकड़े अलग-अलग हैं। 18 नमूना यूएलबी में से 14 में धर्मकांटे ही स्थापित नहीं किए गए, जिससे रोजाना एकत्रित कचरे का सटीक मापन संभव नहीं हो सका। नगर परिषद, भिवाड़ी में तो कचरा संग्रहण के लिए दर्शाए गए वाहनों में एक यात्री वाहन तक शामिल पाया गया।

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