राज्यस्तर पर बनेगी वेलनेस सेल, मेडिकल छात्रों के लिए कॉलेज में खुलेंगे वेलबीइंग सेंटर
समस्या समाधान को स्टूडेंट एप बनेगा
चिकित्सा विभाग की ओर अब मेडिकल के विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए हर मेडिकल कॉलेज में एक वेलबीइंग सेंटर एवं राज्य स्तर पर वेलनेस सेल की स्थापना की जाएगी।
जयपुर। चिकित्सा विभाग की ओर अब मेडिकल के विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए हर मेडिकल कॉलेज में एक वेलबीइंग सेंटर एवं राज्य स्तर पर वेलनेस सेल की स्थापना की जाएगी। चिकित्सा शिक्षा आयुक्त नरेश गोयल ने मेडिकल छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण के लिए गठित राज्य स्तरीय टास्क फोर्स की पहली बैठक में इसे लेकर आदेश जारी किए हैं। बैठक में नेशनल टास्क फोर्स की रिपोर्ट पर चर्चा करते हुए मेडिकल कॉलेजों में सुविधाओं और मानसिक संबल के लिए प्रशासनिक और शैक्षणिक ढांचे में सुधार के निर्देश दिए। गोयल ने बताया कि छात्रों के मानसिक तनाव को कम करने के लिए प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में एक समर्पित वेलबीइंग सेंटर और वेलनेस सेल की स्थापना तुरंत की जाएगी। साथ ही प्रत्येक संस्थान में एक डीन मेंटल वेलबीइंग की नियुक्ति भी की जाएगी, जो विशेष रूप से छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों की मोनिटरिंग करेंगे। छात्रों और फैकल्टी के लिए नियमित ओरिएंटेशन प्रोग्राम अनिवार्य होंगे, ताकि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाई जा सके।
समस्या समाधान को स्टूडेंट एप बनेगा
सुरक्षात्मक उपायों के लिए छतों की बैरिकेडिंग सुनिश्चित होगी। संपूर्ण कैंपस में प्रभावी निगरानी तंत्र विकसित किया जाएगा। छात्रों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए ग्रिवांस रिडरेसल सिस्टम के तहत एक स्टूडेंट एप विकसित की जाएगी। साथ ही शैक्षणिक संसाधनों को आधुनिक बनाने के लिए ई लाइब्रेरी के विस्तार और सुधार पर जोर दिया जाएगा। मानसिक संबल के लिए कॉलेजों में सहकर्मी सहायता समूह विकसित करने, करियर काउंसलिंग करने और साथ ही पूर्व छात्रों के अनुभव का लाभ भी दिलाया जाएगा।
कैंपस जीवन को तनावमुक्त बनाने के लिए आयुक्त ने अनिवार्य योग सत्र, खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों को नियमित रूप से आयोजित करने के लिए भी कहा है। संकट की स्थिति में त्वरित सहायता के लिए टेलीमानस हेल्पलाइन का पूरे कैंपस में व्यापक प्रचार प्रसार भी होगा। ड्यूटी डॉक्टरों के लिए 24 घंटे कैंटीन सुविधा शुरू होगी। सहयोग के लिए एनजीओ एवं प्रतिष्ठित सामाजिक संस्थाओं को भी स्त्रिरय किया जाएगा। लक्ष्य कुशल चिकित्सक तैयार करना ही नहीं बल्कि एक ऐसा सुरक्षितए संसाधन संपन्न और संवेदनशील वातावरण प्रदान करना है, जहां हमारे भविष्य के डॉक्टर मानसिक और शारीरिक रूप से पूर्णत: सशक्त होकर राष्ट्र सेवा कर सकें।

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