धोखाधड़ी मामले में सुमित अग्रवाल को राजस्थान हाई कोर्ट से राहत : गिरफ्तारी पर रोक, पढ़ें पूरा मामला
परिवादी को लाखों रुपयों का नुकसान
राजस्थान हाई कोर्ट ने कलाइट इंजीनियरिंग एंड वर्कस के प्रोपराइटर गुवाहाटी निवासी सुमित अग्रवाल को राहत देते हुए उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर में उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी।
जोधपुर। राजस्थान हाई कोर्ट ने कलाइट इंजीनियरिंग एंड वर्कस के प्रोपराइटर गुवाहाटी(असम) निवासी सुमित अग्रवाल को राहत देते हुए उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर में उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। न्यायाधीश बलजिंदर सिंह संधू की एकल पीठ ने यह आदेश सुमित अग्रवाल की ओर से दायर आपराधिक विविध याचिका पर सुनवाई के पश्चात दिया। सुमित की ओर से अधिवक्ता हस्तीमल सारस्वत एवं रेखा सांखला ने पैरवी की। याचिका में भीलवाड़ा के कोतवाली थाना में दर्ज एफआईआर को चुनौती दी गई थी।
यह एफआईआर क्रेन सर्विस भीलवाड़ा के मालिक परिवादी गोविंद टांक ने सुमित के विरुद्ध धोखाधड़ी के आरोप में दर्ज करवाई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि डूंगलस सीमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के कार्य हेतु परिवादी को 700 एमटी क्रेन उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया, उक्त आदेश के अनुसार क्रेन की मोबिलाइजेशन एवं डी- मोबिलाइजेशन के लिए बीस लाख रुपयें एवं ढाई लाख रुपए प्रतिदिन किराया तय किया गया था, उसकी क्रेन 17 अगस्त 2025 को असम राज्य के पाठशाला नगर पहुंची, तत्पश्चात 18 अगस्त को कस्टम क्लीयरेंस के पश्चात क्रेन भूटान साइट पर पहुंचाई गई, कार्य के दौरान सुमित अग्रवाल ने परिवादी के स्टाफ एवं ऑपरेटर को निर्धारित क्षमता से अधिक भार उठाने हेतु धमकाया जिसके कारण क्रेन को गंभीर क्षति पहुंची, जिससे परिवादी को लाखों रुपयों का नुकसान उठाना पड़ा। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि सुमित ने परिवादी की क्रेन को अवैध रूप से रोक लिया हैं एवं उसके एक करोड़ चौरासी लाख छत्तीस हजार रुपए नहीं दिए। याचिका पर बहस करते हुए याची के अधिवक्ता सारस्वत ने तर्क दिया कि यह मामला पक्षकारों के

Comment List