सावधान: मधुमक्खियों का छत्ता तोड़ा तो 3 साल की जेल
जंगल हर जीव का प्राकृतिक आवास
शेरगढ़ सेंचुरी सहित जंगलों में मधुमक्खियों को नुकसान पहुंचाने पर होगी कार्रवाई।
कोटा। जंगल में मधुमक्खियों का छत्ता तोड़ना अब महंगा पड़ सकता है। ऐसा करने वालों को सीधे जेल की हवा खानी पड़ सकती है, क्योंकि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मधुमक्खियां भी संरक्षित वन्यजीवों में शामिल हैं। वन विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि मधुमक्खियों के छत्ते को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें 3 साल तक की सजा का प्रावधान है। दरअसल, वन्यजीव विभाग ने शेरगढ़ सेंचुरी में तेजी से घट रही मधुमक्खियों की संख्या को बढ़ाने के लिए निगरानी तंत्र मजबूत किए हैं। सेंचुरी व जंगलों में मधुमक्खियों के छत्ते को तोड़ने व नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की वनकर्मियों को निर्देश जारी किए हैं।
सेंचुरी व जंगल में मधुमक्खियों का छत्ता तोड़ना अपराध
डीएफओ अनुराग भटनागर ने बताया कि जंगल, केवल शेर, बाघ, पैंथर, भालू या हिरण का ही घर नहीं है, बल्कि चींटी से लेकर मधुमक्खी तक हर जीव का प्राकृतिक आवास है और सभी को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम में संरक्षण प्राप्त है। इसके बावजूद कई लोग चोरी-छिपे जंगलों में जाकर मधुमक्खियों के छत्ते तोड़ देते हैं, जो कि गंभीर वन अपराध की श्रेणी में आता है। हालांकि, यह एक्ट केवल सेंचूरी व जंगलों में ही प्रभावी होगा।
3 से 7 साल तक की सजा का प्रावधान
उन्होंने बताया कि शेरगढ़ सेंचुरी सहित अन्य वन क्षेत्रों में यदि कोई व्यक्ति मधुमक्खियों का छत्ता तोड़ता है तो यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 का उल्लंघन की श्रेणी में आता है। इस पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 29 के तहत 3 साल तक की सजा का प्रावधान है। वहीं, वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुंचाने, वन्यजीवों को परेशान करने और छेड़छाड़ करने जैसी धाराओं में मामला दर्ज कर न्यायालय में चालान पेश किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कानून में स्पष्ट प्रावधान है कि जंगल में रहने वाले किसी भी छोटे या बड़े जीव को नुकसान पहुंचाना वन्यजीव संरक्षण कानून का गंभीर उल्लंघन है।
पर्यावरण व खाद्य श्रृंखला की महत्वपूर्ण कड़ी मधुमक्खी
वैज्ञानिकों का मानना है कि मधुमक्खियां पर्यावरण और खाद्य श्रृंखला की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। यदि मधुमक्खियां नहीं रहेंगी तो परागण नहीं होगा, फसलें नहीं उगेंगी और धीरे-धीरे जीवन संकट में पड़ जाएगा। यदि मधुमक्खियां नहीं रहेंगी तो फसलों का उत्पादन प्रभावित होगा और पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ जाएगा। इसलिए मधुमक्खियों की रक्षा करना केवल कानून का पालन नहीं, बल्कि मानव जीवन की सुरक्षा भी है।
एक छत्ते में 50 हजार मधुमक्खियां व उनके अंडे होते हैं
उन्होंने बताया कि पहले के लोग मधुमक्खी का छत्ता टेक्निक से तोड़ते थे। वो केवल ऊपर ऊपर से शहद निकालते थे और रानी मक्खी को नहीं मारते थे। आजकल शहद निकालने के लिए लोग पूरे छत्ते को तोड़ देते है। एक छत्ते में 50 हजार मधुमक्खियां व उनके अंडे होते हैं। छत्ता तोड़ने से सभी मर जाते हैं। हम शेरगढ़ अभ्यारण के अलावा भैंसरोडगढ़ सेंचुरी, अभेडा बायोलॉजिकल पार्क व कोटा जू में भी मधुमक्खियों के बॉक्स लगाने के प्रयास कर रहे हैं।
इनका कहना है
सेंचुरी के अंदर कोई भी मधुमक्खियों के छत्ते को तोड़ता है या उनके प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुंचाता है तो उसके खिलाफ वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 की धारा-29 के तहत कार्रवाई की जाएगी जिसमें तीन साल तक की सजा का प्रावधान है।
-अनुराग भटनागर, डीएफओ वन्यजीव विभाग कोटा

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