राजस्थान में बाल विवाह रोकथाम के लिए सख्ती, प्रशासन को जारी निर्देश
दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही
राज्य सरकार ने प्रदेश में बाल विवाह की कुप्रथा पर प्रभावी रोक लगाने के लिए सभी जिला कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों और संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं।
जयपुर। राज्य सरकार ने प्रदेश में बाल विवाह की कुप्रथा पर प्रभावी रोक लगाने के लिए सभी जिला कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों और संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। गृह विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत बाल विवाह दंडनीय अपराध है, इसलिए इसकी रोकथाम के लिए निरंतर निगरानी और सक्रिय कार्रवाई आवश्यक है। सरकार ने विशेष रूप से अक्षय तृतीया, पीपल पूर्णिमा जैसे अवसरों पर सतर्कता बढ़ाने को कहा है, क्योंकि इन दिनों बाल विवाह की संभावना अधिक रहती है।
ग्राम और तहसील स्तर पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, पंचायत प्रतिनिधियों और अन्य विभागीय कर्मचारियों को जोड़कर जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, विवाह आयोजनों से जुड़े व्यक्तियों—जैसे पंडित, बैंड, हलवाई आदि—को भी बाल विवाह में सहयोग नहीं करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। 181 हेल्पलाइन और पुलिस कंट्रोल रूम (100) के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने की सुविधा का व्यापक प्रचार करने को कहा गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि बाल विवाह की सूचना मिलने पर तत्काल कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाए।

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