30 साल पुरानी एक मात्र मशीन पर धुलाई का जिम्मा, जानें पूरा मामला
दो मशीनों में से एक पूरी तरह गल चुकी है
एमबीएस अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से लॉन्ड्री मशीन हुई नाकारा।
कोटा। लाखों की मशीनरी भी प्रशासनिक लापरवाही के चलते किस तरह कण्डम हो जाती है इसकी बानगी कोटा के एमबीएस अस्पताल के लॉन्ड्री सेक्शन में देखने को मिली । बेपरवाही का आलम यह है कि अस्पताल में मरीजों की चादरें, कंबल और अन्य कपड़ों की धुलाई अभी भी लगभग 25 वर्ष पुरानी मशीनों से की जा रही है, जिससे काम की रफ्तार और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रही हैं। अस्पताल से आए दिन दाग लगे चद्दरों की शिकायतें भी कितनी बार परिजनों द्वारा सामने आती रहती है । लॉन्ड्री सेक्शन के प्रभारी ने बताया कि यहां पर सोमवार और गुरुवार को ही कपड़े लिए और दिए जाते हैं, क्योंकि पुरानी मशीनें होने के कारण लगातार धुलाई का काम चल रहा है। इसी वजह से पूरे सप्ताह में नियमित और समय पर कपड़ों की आपूर्ति करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
मात्र 70 हजार की दरकार
जानकारी के अनुसार वर्ष 2020 में अस्पताल प्रशासन को एक आधुनिक कपड़ा धुलाई मशीन स्थापित की गई थी, जिसे एक आॅयल कम्पनी के सहयोग से उपलब्ध कराया गया था। यह मशीन अत्याधुनिक तकनीक से लैस थी । पारम्परिक ब्लीच,सोडा व सर्फ के प्रयोग से कपडो व त्वचा को भी परेशानी होती है जबकि नई मशीन व उन्नत कैमिकल से अधिक मात्रा में साफ-सफाई सुनिश्चित करने में सक्षम थी । यहां काम करने वाले लोगों ने बताया कि इसको देखने के लिए इंजीनियर भी आए थे जिन्होने 70 हजार खर्चा बताया था । कार्मिकों ने बताया कि नई लगाई गई मशीन को पहले तो करीब दो सालों तक चालू ही नहीं किया गया। 2022-23 में मशीन को चालू किया गया तब काम में थोड़ा आराम और सुधार आया था लेकिन पिछले करीब 14 माह से भी अधिक का समय गुजर गया लेकिन मशीन चालू नहीं हो पायी है।
बेड़शीट सहित ओटी ड्रेस की धुलाई
परिसर में स्थापित इस धुलाई केन्द्र पर रोजाना करीब 600 बेडशीट के अलावा आई ओटी, जनरल व न्यूरो आॅपरेशन थियेटर के भी कपडे़ आते है। यहां पर पुराने समय की धुलाई करने वाली दो मशीनें है इनमें से एक तो पूरी तरह गल चुकी है जबकि दूसरी को किसी तरह जुगाड़ करके चलाया जा रहा है जो भी बंद हो जाए अस्पताल में भारी परेशानी पैदा हो सकती है।
इनका कहना है
मशीन की कम्पनी का पता कराया है, मशीन की मरम्मत के लिए आवश्यक पत्रावलियां तैयार की जा चुकी है, विशेषज्ञों के अनुसार करीब 70-80 हजार का खर्च आने का एस्टीमेट है। इसको चालू करवाया जाएगा।
- डॉ. कर्नेश गोयल, उपाधीक्षक एमबीएस असपताल

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