राजस्थान में अब संभाग स्तर पर लगेगी पेंशन अदालत, अप्रैल से होगी शुरुआत
पहले चरण में पारिवारिक पेंशनरों को प्राथमिकता
वित्त विभाग ने पेंशन मामलों के निस्तारण हेतु संभाग स्तर पर वर्ष में चार बार ‘पेंशन अदालत’ आयोजित करने का निर्णय लिया। पहली अदालत अप्रैल 2026 में होगी। पारिवारिक पेंशनरों को प्राथमिकता दी जाएगी। तकनीकी व प्रक्रियात्मक समस्याओं का मौके पर समाधान कर लंबित प्रकरणों का त्वरित निस्तारण किया जाएगा।
जयपुर। वित्त विभाग ने पेंशन प्रकरणों के निस्तारण में आ रही देरी और शिकायतों के समाधान के लिए बड़ा निर्णय लिया है। विभाग ने प्रत्येक संभाग स्तर पर वर्ष में चार बार-अप्रैल, जुलाई, अक्टूबर और जनवरी-‘पेंशन अदालत’ आयोजित करने का परिपत्र जारी किया है।
वित्त विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार पहली पेंशन अदालत अप्रैल 2026 में आयोजित की जाएगी। इसके बाद जुलाई 2026, अक्टूबर 2026 और जनवरी 2027 में क्रमशः अगली अदालतें लगेंगी। स्थान और समय का निर्धारण पेंशनर्स संगठनों तथा संबंधित अधिकारियों से विचार-विमर्श के बाद किया जाएगा। व्यापक प्रचार-प्रसार मीडिया और समाचार पत्रों के माध्यम से सुनिश्चित किया जाएगा।
मौके पर होगा समस्याओं का समाधान :
पेंशन अदालत का उद्देश्य सेवानिवृत्त कार्मिकों के पेंशन प्रकरणों में आ रही तकनीकी, प्रक्रियात्मक और नियमों की व्याख्या संबंधी समस्याओं का मौके पर ही समाधान करना है।
राजस्थान सेवा नियम, 1951 एवं राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1996 के प्रावधानों की स्पष्ट व्याख्या कर प्रकरणों का त्वरित निस्तारण किया जाएगा।
विभागीय त्रुटियों के कारण लंबित मामलों को मौके पर सुलझाया जाएगा।
सेवानिवृत्ति परिलाभों से जुड़ी तकनीकी अड़चनों की पहचान कर तत्काल समाधान किया जाएगा।
अदालतें संभाग स्तर पर आयोजित होंगी और जिलों के कोषाधिकारी, कार्यालयाध्यक्ष व पेंशनर्स संगठन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ेंगे।
पहले चरण में पारिवारिक पेंशनरों को प्राथमिकता :
प्रथम चरण की पेंशन अदालत पारिवारिक पेंशनरों के लिए समर्पित रहेगी। विधवा, तलाकशुदा, अविवाहित पुत्री और दिव्यांग आश्रितों के मामलों को प्राथमिकता से निपटाया जाएगा। विशेष रूप से शिक्षा विभाग के मामलों पर फोकस रहेगा। राज्य में हर वर्ष लगभग 11 हजार सेवानिवृत्त कार्मिकों के पीपीओ जारी होते हैं। 31 मार्च 2026 तक शिक्षा विभाग से करीब 2200 कर्मचारी सेवानिवृत्त होने वाले हैं, जबकि लगभग 700 ऐसे कार्मिक हैं जिनके पेंशन प्रकरण अब तक पेंशन विभाग को प्राप्त नहीं हुए हैं। इन लंबित मामलों के कारण पेंशन अधिकृतियां जारी नहीं हो सकी हैं।
वित्त विभाग का यह कदम पेंशनरों की समस्याओं के त्वरित समाधान और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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