प्रदेश के 108 स्थानों पर स्वैच्छिक रक्तदान शिविर लगाए जाएंगे, रक्तदान शिविरों के बहुरंगीय पोस्टर का विमोचन
कार्यक्रम महावीर के 2625वें जन्म कल्याणक महोत्सव के उपलक्ष्य में किए जा रहे
राजस्थान जैन सभा महावीर के 2625वें जन्म कल्याणक पर मार्च में 108 स्थानों पर रक्तदान शिविर लगाएगी। 1 से 29 मार्च तक 2625 यूनिट रक्त संग्रह का लक्ष्य है। जयपुर में 93 और अन्य जिलों में 15 शिविर होंगे। आयोजन मानव सेवा और सामाजिक समरसता को समर्पित रहेगा।
जयपुर। भगवान महावीर के अहिंसा और करुणा पर आधारित संदेश जीओ और जीने दो को समाज में व्यवहारिक रूप देने के उद्देश्य से राजस्थान जैन सभा के तत्वावधान में मार्च माह के दौरान प्रदेशभर में व्यापक सेवा गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी। यह कार्यक्रम महावीर के 2625वें जन्म कल्याणक महोत्सव के उपलक्ष्य में किए जा रहे हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य मानव सेवा, सामाजिक समरसता और जरूरतमंदों की सहायता है।
सभा के अनुसार मार्च माह के प्रत्येक रविवार 1 मार्च से 29 मार्च तक प्रदेश के 108 स्थानों पर स्वैच्छिक रक्तदान शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों में कुल 2625 यूनिट रक्त एकत्रित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। एकत्रित रक्त को जरूरतमंद मरीजों को नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे गंभीर बीमारियों से जूझ रहे रोगियों को राहत मिल सकेगी।
इन रक्तदान शिविरों के बहुरंगीय पोस्टर का विमोचन दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र महावीर जी के अध्यक्ष सुधांशु कासलीवाल ने एक सादे समारोह में किया। इस अवसर पर सभा के अध्यक्ष सुभाष चन्द जैन, वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रदीप जैन, उपाध्यक्ष विनोद जैन कोटखावदा, महामंत्री मनीष बैद तथा रक्तदान शिविर के मुख्य संयोजक राजीव पाटनी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
सभा पदाधिकारियों ने बताया कि जयपुर शहर में 93 स्थानों पर तथा जयपुर से बाहर शाखाओं के माध्यम से 15 स्थानों पर शिविर आयोजित होंगे। बेहतर समन्वय के लिए जयपुर शहर को 13 जोनों में विभाजित कर 26 क्षेत्रीय संयोजक नियुक्त किए गए हैं। सभी स्थानों पर चिकित्सा विशेषज्ञों और ब्लड बैंक टीमों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है, ताकि रक्तदान प्रक्रिया सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके।
आयोजकों ने समाज के सभी वर्गों से अधिकाधिक संख्या में रक्तदान करने का आह्वान किया है। उनका कहना है कि रक्तदान महादान है और इससे न केवल किसी का जीवन बचाया जा सकता है, बल्कि समाज में सेवा और सहयोग की भावना भी मजबूत होती है। महावीर जन्म कल्याणक वर्ष को सेवा वर्ष के रूप में मनाने की इस पहल से जैन समाज के साथ-साथ आमजन में भी सकारात्मक संदेश जाएगा।

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