राजस्थान विश्वविद्यालय में छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती समारोह आयोजित, राज्यपाल ने युवाओं को दिया संदेश
विश्वविद्यालयों को चरित्रवान और राष्ट्रनिष्ठ नागरिक तैयार करने पर भी ध्यान देना चाहिए
राजस्थान विश्वविद्यालय में छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती मनाई गई। मुख्य अतिथि राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने उन्हें राष्ट्रनिर्माण का प्रेरक आदर्श बताया। उन्होंने युवाओं से शिवाजी के साहस, सुशासन और संगठन शक्ति को अपनाने का आह्वान किया।
जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय के मानविकी सभागार में छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती धूमधाम से मनाई गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान के राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागड़े रहे, जबकि अध्यक्षता कुलपति प्रो. आनंद भालेराव ने की। कुलगुरु प्रो. अल्पना कटेजा ने अतिथियों का स्वागत किया।
राज्यपाल ने अपने उद्बोधन में शिवाजी महाराज को राष्ट्रनिर्माण का प्रेरक आदर्श बताते हुए कहा कि उनका व्यक्तित्व मातृसंस्कारों, साहस, संगठन शक्ति और दूरदर्शिता का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने बताया कि शिवाजी महाराज ने किशोरावस्था में ही हिंदवी स्वराज का संकल्प लेकर अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष का मार्ग चुना। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अनुशासन, रणनीति और जनसहभागिता के बल पर सुशासन की मजबूत व्यवस्था स्थापित की।
उन्होंने पन्हाला से विशालगढ़ तक की ऐतिहासिक यात्रा तथा वीर बाजी प्रभु देशपांडे के बलिदान का उल्लेख करते हुए इसे राष्ट्रभक्ति और नेतृत्व का अनुपम उदाहरण बताया। साथ ही अफ़ज़ल ख़ान प्रसंग और आगरा से निकलने की घटना को शिवाजी महाराज की कूटनीतिक कुशलता और साहस का प्रतीक बताया। राज्यपाल ने कहा कि शिवाजी महाराज केवल महान योद्धा ही नहीं, बल्कि कुशल प्रशासक भी थे, जिन्होंने किसानों की सुरक्षा, महिलाओं के सम्मान और धार्मिक सहिष्णुता को शासन का आधार बनाया।
उन्होंने युवाओं से शिवाजी महाराज के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों को चरित्रवान और राष्ट्रनिष्ठ नागरिक तैयार करने पर भी ध्यान देना चाहिए। अंत में उन्होंने आयोजन के लिए विश्वविद्यालय परिवार को बधाई दी।

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