स्वामी बालमुकुंदाचार्य ने कहा-संस्कृत केवल भाषा ही नहीं बल्कि भारत की जीवन दृष्टि भी है, जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह को किया संबोधित
संस्कृत भारत की जीवन-दृष्टि का मूल: बालमुकुंदाचार्य
हवामहल विधायक स्वामी बालमुकुंदाचार्य ने कहा कि संस्कृत भारतीय जीवन-दृष्टि और सांस्कृतिक चेतना का आधार है, जिसे संरक्षित कर शोध, तकनीक और आधुनिक शिक्षा से जोड़ना आवश्यक है।
जयपुर। हवामहल विधानसभा क्षेत्र के विधायक स्वामी बालमुकुंदाचार्य ने कहा है कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की जीवन-दृष्टि, ज्ञान-परंपरा और सांस्कृतिक चेतना का मूल स्रोत है। सनातन संस्कृति की आधारशिला संस्कृत भाषा है बालमुकुंदाचार्य शनिवार को जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा को संरक्षित करना और भावी पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने त्रिवेणी महाराज के संकल्प के अनुरूप वैदिक परंपरा को आगे बढ़ाना, प्राचीन नक्षत्र व्यवस्था, अश्वमेघ यज्ञ परंपरा तथा प्राचीन ग्रंथों और लेखों के संरक्षण एवं प्रचार का कार्य आज के समय में अत्यंत आवश्यक है।
मुख्य अतिथि के रूप में हरिद्वार स्थित उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाकांत पांडेय ने कहा कि संस्कृत विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान परंपरा के संवाहक हैं। आवश्यकता है कि संस्कृत को शोध, तकनीक और आधुनिक विषयों से जोड़ते हुए वैश्विक मंच पर स्थापित किया जाए, ताकि इसकी सार्वकालिक उपयोगिता सिद्ध हो सके। कुलपति प्रो.मदनमोहन झा ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल शास्त्रों का अध्ययन नहीं, बल्कि संस्कृत ज्ञान को समकालीन संदर्भों से जोड़कर समाजोपयोगी बनाना है। संस्कृत शिक्षा के माध्यम से नैतिकता, अनुशासन और समन्वय की भावना विकसित होती है, जो राष्टÑ निर्माण में सहायक है।

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