फर्जी फर्में बना बैंक से लिया लोन : 7 साल की कैद, जांच अधिकारियों पर भी कार्रवाई के आदेश
अनुसंधान अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करे
फर्जी फर्मों के जरिए विजया बैंक से करीब 5 करोड़ का लोन घोटाला करने के 25 साल पुराने मामले में सीबीआई अदालत ने आलोक कुमार अग्रवाल को 7 साल की सजा। 50 हजार रुपये जुर्माना। अरुण अग्रवाल बरी। सांवरमल की सुनवाई के दौरान मृत्यु। अदालत ने जांच अधिकारी पर कार्रवाई के निर्देश।
जयपुर। सीबीआई मामलों के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने फर्जी फर्में बनाकर विजया बैंक से लोन लेने के 25 साल पुराने मामले में अभियुक्त आलोक कुमार अग्रवाल को 7 साल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने 50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। प्रकरण में अदालत ने अभियुक्त के भाई अरुण अग्रवाल को दोषमुक्त कर दिया है। वहीं सुनवाई के दौरान अभियुक्त के पिता सांवरमल की मौत हो चुकी है।
पीठासीन अधिकारी जया अग्रवाल ने अपने आदेश में कहा कि जांच अधिकारी ने फर्जी फर्मो के खाता खोलने के प्रार्थना पत्र तक एकत्रित करने का प्रयास नहीं किया। जबकि वह जानता था कि ये प्रार्थना पत्र ही मुख्य साक्ष्य होते हैं, जो बैंककर्मियों की मिलीभगत को उजागर करते हैं। ऐसे में सीबीआई निदेशक को निर्देश दिए जाते हैं कि वह प्रकरण के मुख्य अनुसंधान अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करे। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक अनिरुद्ध दाधीच ने बताया कि मामले में विजया बैंक, जयपुर में 10 फर्मो के नाम से खाते खोले गए। इन खातों के जरिए बैंक को करीब पांच करोड़ रुपए की हानि पहुंचाई गई थी।

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