गौशाला में चिकित्सा सुविधाओं का अभाव

हजारों गौवंश बिना इलाज व शेड के, बरसात धूप में खुले में रहने को मजबूर

गौशाला में चिकित्सा सुविधाओं का अभाव
कम्पाउंडरों के भरोसे ही बीमार व कमजोर पशुओं का उपचार किया जा रहा है।

कोटा। नगर निगम कोटा दक्षिण की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला इन दिनों गंभीर समस्याओं से जूझ रही है। यहां हजारों की संख्या में लावारिस हालत में पकड़कर लाए गए पशु रखे गए हैं, लेकिन सुविधा के नाम पर हालात बेहद चिंताजनक हैं। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि इतनी बड़ी संख्या में गौवंश के लिए गौशाला में अब तक पशु चिकित्सालय तक संचालित नहीं हो पाया है। कम्पाउंडरों के भरोसे ही बीमार व कमजोर पशुओं का उपचार किया जा रहा है।

ग्रीनबेल्ट पर खर्च, जरूरी काम अधूरे
सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि निगम की ओर से गौशाला में जो आवश्यक निर्माण कार्य हैं, वे तो अधूरे पड़े हैं। इसके उलट लाखों रुपए खर्च कर ग्रीनबेल्ट विकसित की गई है। लेकिन बीमार पशुओं के लिए चिकित्सा सुविधा और रहने के लिए शेड जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं हुई हैं।

निगम का पक्ष
इधर नगर निगम कोटा दक्षिण के अधिकारियों का कहना है कि गौशाला में निर्माण कार्यों की टेंडर प्रक्रिया जारी है। जल्द ही पशुओं के लिए शेड व अन्य सुविधाओं का विकास किया जाएगा।

कायन हाउस की स्थिति और खराब 
सिंह ने बताया कि किशोरपुरा स्थित कायन हाउस की स्थिति तो और भी खराब है। वहां तो चिकित्सा केन्द्र तक मौजूद नहीं है। कम्पाउंडरों से ही काम चलाया जा रहा है। शहर में निजी स्तर पर करीब दो दर्जन पशु चिकित्सा केन्द्र संचालित हो रहे हैं, लेकिन निगम की गौशालाओं में मूलभूत सुविधा तक नहीं मिल रही है। इससे बीमार पशुओं की देखभाल में कठिनाई आती है।

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डॉक्टर आते हैं सप्ताह में एक-दो बार
गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि यहां लाए जाने वाले अधिकांश गौवंश बीमार और कमजोर स्थिति में होते हैं। उन्हें लगातार चिकित्सा सुविधा की जरूरत रहती है। लेकिन निगम की ओर से यहां स्थायी पशु चिकित्सक तैनात नहीं है। बोरावास व मंडाना से सप्ताह में केवल एक-दो बार ही डॉक्टर आते हैं। ऐसे में आपात स्थिति में समय पर उपचार न मिल पाने से कई बार गंभीर परेशानी खड़ी हो जाती है। फिलहाल एक रिटायर्ड डॉक्टर को निगम की ओर से नियुक्त किया गया है, जिनसे काम चल रहा है।

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टेंडर तक नहीं हुए
समिति अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह का कहना है कि निगम अधिकारियों को कई बार कहा गया, लेकिन अब तक शेड लगाने का काम शुरू नहीं हुआ। कई कार्यों के तो टेंडर तक जारी नहीं हुए हैं। इससे गौवंश की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर लगातार खतरा बना हुआ है।

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 बरसात व धूप में खुले में रहने को मजबूर पशु
गौशाला परिसर में एक और बड़ी समस्या टीनशेड की कमी है। मानसून में भारी बारिश और गर्मी में तेज धूप से बचाने के लिए शेड जरूरी है, लेकिन निगम अभी तक यह काम भी शुरू नहीं कर पाया है। इस कारण अधिकतर पशु खुले में ही खड़े रहने को मजबूर हैं। बारिश में गीली जमीन पर खड़े रहने और धूप में तपते रहने से उनकी सेहत और बिगड़ रही है।

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