परकोटे में गूंजेंगी ढूंढाड़ी भजनों की स्वर लहरियाँ : 11 से 14 मार्च तक आयोजित होगा 86वां श्री प्रेमभाया महोत्सव, चार दिवसीय भक्ति संगीत समारोह
पूरा वातावरण भक्ति रस से सराबोर रहेगा
परकोटे की पुरानी बस्ती स्थित युगल कुटीर में 11 से 14 मार्च तक 86वां श्री प्रेमभाया महोत्सव आयोजित। चार दिन तक ढूंढाड़ी भजनों और भक्ति संगीत की प्रस्तुतियां। 11 मार्च को पंचामृत अभिषेक से कार्यक्रम शुरू।
जयपुर। 11 से 14 मार्च तक 86वां श्री प्रेमभाया महोत्सव आयोजित किया जाएगा। परकोटे की पुरानी बस्ती स्थित युगल कुटीर (जयलाल मुंशी का रास्ता, चांदपोल बाजार) में होने वाले इस महोत्सव के दौरान चार दिनों तक ढूंढाड़ी भजनों की स्वर लहरियाँ गूंजेंगी और पूरा वातावरण भक्ति रस से सराबोर रहेगा।
जयपुर की धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं में इस महोत्सव का विशेष महत्व है। शहर की स्थापत्य कला, तीज-त्योहारों और संत-मनीषियों की परंपरा ने जिस तरह जयपुर को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई है, उसी कड़ी में श्री प्रेमभाया महोत्सव भी भक्ति संगीत की विशिष्ट परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। महोत्सव में देश-प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से भजन गायक, संगीतज्ञ और वाद्य कलाकार आकर अपनी प्रस्तुतियाँ देते हैं।
भक्त कवि पंडित युगल किशोर शास्त्री का जन्म वर्ष 1916 में पुरानी बस्ती के होली टीबा स्थित युगल कुटीर में हुआ था। संस्कृत और आयुर्वेद के विद्वान शास्त्री भगवान श्रीकृष्ण के अनन्य उपासक थे। उन्होंने श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप को ढूंढाड़ी भाषा में “श्री प्रेमभाया सरकार” नाम देकर वर्ष 1940 में भक्ति की परंपरा की शुरुआत की। उनकी इस साधना ने समाज में प्रेम, भक्ति और सांस्कृतिक चेतना का संदेश फैलाया। आज भी यह परंपरा ढूंढाड़ क्षेत्र सहित देश-विदेश में बसे हजारों भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान कर रही है।
समिति के संरक्षक विजय किशोर शर्मा और प्रचार प्रमुख डॉ लोकेश शर्मा ने बताया कि इस वर्ष महोत्सव 11 से 14 मार्च तक आयोजित होगा। 11 मार्च को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्री प्रेमभाया सरकार का पंचामृत अभिषेक कर नवीन पोशाक धारण कराई जाएगी। इसके बाद 11, 12 और 13 मार्च को रात्रि 8 बजे से पूरी रात भक्ति संगीत समारोह आयोजित होगा, जिसमें ख्यातनाम भजन गायक और संगीतज्ञ अपनी प्रस्तुतियाँ देंगे।
इसके अलावा 12, 13 और 14 मार्च को दिन में महिला मंडलों द्वारा भक्ति संगीत कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। महोत्सव का समापन 14 मार्च को सायं 7 बजे नगर संकीर्तन के साथ होगा, जो परकोटे के विभिन्न मार्गों से होते हुए प्रातः 7 बजे पुनः सत्संग स्थल पर पहुंचकर सम्पन्न होगा।
चार दिवसीय महोत्सव की परंपरा :
इस वर्ष महोत्सव चार दिवसीय होगा। भक्त शिरोमणि युगलजी महाराज ने वर्ष 1940 से युगल कुटीर में प्रत्येक शनिवार को नियमित सत्संग प्रारंभ किया था, जो आज भी जारी है। जब शीतलाष्टमी बुधवार को पड़ती है तो शनिवार के सत्संग को भी महोत्सव में शामिल कर इसे चार दिवसीय भक्ति संगीत समारोह के रूप में मनाया जाता है।

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