सिस्टम की खामियों में पिस गया सोना का संघर्ष

मानसिक संघर्ष और टूटी उम्मीदें

सिस्टम की खामियों में पिस गया सोना का संघर्ष

सोना का सफर केवल एक नौकरी का नहीं, बल्कि हालातों से लड़कर ऊपर उठने का जुनून था।

कोटा। अपनी पुरानी नौकरी (कांस्टेबल ) गंवा चुकीं और नई नौकरी (एसआई 2021) पर संकट के बादल देख, सोना कुमारी आज अपने पीहर में वक्त काट रही हैं। जो सोना कभी अपनी दहाड़ और मेहनत के लिए जानी जाती थीं, आज उन्होंने खुद को घर के एक कमरे में कैद कर लिया है।
उनके पति किशोर कुमार कहते हैं कि सिस्टम की खामियों ने एक ईमानदार और संघर्षशील अभ्यर्थी को गुनहगारों की कतार में लाकर खड़ा कर दिया है। सोना कुमारी जिनके लिए साल 2021 किसी बड़े सपने के सच होने जैसा था, लेकिन आज वही सपना एक धुंधली याद और अनकहे दर्द में तब्दील हो गया है। गांव व परिवार के लिये अभिमान दिलाने वाली आज व्यवस्था की अनिश्चितता के कारण अपने ही घर में खामोश बैठी है। संघर्ष के साक्षी व सहभागी रहे पति किशोर की तो मानो सारी तपस्या ही निष्फल चली गयी। वहीं सोना के जीवन को अनिश्चितता ने घेर लिया है,बल्कि मेहनत से हासिल पुरानी नौकरी के भी चले जाने से मानो जीवन की सारी पुंजी ही लुट गयी हो।
राजस्थान पुलिस की हाड़ी रानी महिला बटालियन में जब 2009 में एक 19 साल की दुबली-पतली लड़की कांस्टेबल के रूप में भर्ती हुई, तो किसी ने नहीं सोचा था कि वह एक दिन प्रदेश की मेरिट लिस्ट में ( एसआई भर्ती 2021 ) में अपना नाम दर्ज कराएगी। सोना कुमारी का सफर केवल एक नौकरी का नहीं, बल्कि अपने हालातों से लड़कर ऊपर उठने का जुनून था।

छुट्टियों में बुने कामयाबी के सपने
एक पुलिसकर्मी की ड्यूटी के बीच पढ़ाई के लिए समय निकालना नामुमकिन सा होता है, लेकिन मैंने अपनी सीएल (उछ) और पीएल (ढछ) को आराम के लिए नहीं, बल्कि किताबों के लिए बचाया।
2014: शादी के बंधन में बंधीं, लेकिन लक्ष्य नहीं बदला।
2016: सब-इंस्पेक्टर भर्ती के फिजिकल में दौड़ के आखिरी पॉइंट पर असफल हुईं। उसी साल फअर प्री निकाला, पर मेंस में रह गईं।
2018: फिर फअर प्री पास किया, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। इन असफलताओं ने मुझे तोड़ा नहीं, बल्कि और मजबूत बनाया।

वो ऐतिहासिक सफलता और बड़ा फैसला
साल 2021 सोना के लिए खुशियों की सौगात लेकर आया। उन्होंने न केवल सब-इंस्पेक्टर की परीक्षा पास की, बल्कि रउ कैटेगरी में पूरे राजस्थान में सेकंड रैंक हासिल करके सबको चौंका दिया। इस सपने को जीने के लिए उन्होंने एक बहुत बड़ा जोखिम लिया।
7 अक्टूबर 2023 सोना ने अपनी 14 साल पुरानी सुरक्षित कांस्टेबल की नौकरी से इस्तीफा दे दिया। उन्हें विश्वास था कि अब वह खाकी के नए और ऊंचे रूतबे के साथ समाज की सेवा करेंगी।

जब अरमानों पर फिरा पानी
दिसंबर 2024 में उन्हें बूंदी जिला अलॉट हुआ। ट्रेनिंग का पहला फेज पूरा हुआ, लेकिन जैसे ही फील्ड पोस्टिंग का समय आया, एसआई भर्ती पर उठे विवादों और कानूनी प्रक्रियाओं के कारण उन्हें फील्ड ट्रेनिंग से रोक दिया गया। जिस वर्दी को उन्होंने 14 साल ईमानदारी से पहना और जिस पद को पाने के लिए पुरानी नौकरी तक छोड़ दी, आज वही भविष्य अधर में लटका है। भर्ती प्रक्रिया में आई रुकावटों और विवादों ने सोना कुमारी को मानसिक रूप से झकझोर कर रख दिया है।

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सोना कुमारी का कहना है
शून्य से उठकर, अभावों को पीछे छोड़कर यहाँ तक पहुँची थी। लेकिन आज जब सब कुछ गवां बैठने की नौबत आई है, तो उस दर्द को शब्दों में बयां करना मुमकिन नहीं है। अब कहानी सुनाने को कुछ बाकी नहीं रहा।सोना की यह कहानी आज राजस्थान के उन हजारों युवाओं का प्रतिनिधित्व कर रही है, जो मेहनत के दम पर आसमान छूना चाहते हैं, लेकिन सिस्टम की अनिश्चितता उन्हें जमीन पर लाकर पटक देती है। 

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