एक ऑपरेटर के भरोसे एमबीएस का आरजीएचएस पर्ची काउन्टर, मची अफरा तफरी
बुआ को लेने जाना है की जिद पर अड़ा ऑपरेटर तो ठप्प पड़ा काम
काउंटर पर घंटों खड़ा रहने के बाद भी मरीजों की पर्चीयां नही बनी।
कोटा। राजस्थान भर में निजी अस्पतालों और दवा काउंटरों द्वारा आरजीएचएस के बहिष्कार के चलते अब सरकारी अस्पतालों पर मरीजों का दबाव असहनीय स्तर तक पहुँच गया है। सोमवार सुबह कोटा के एमबीएस अस्पताल में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब आरजीएचएस पर्ची काउंटर पर घंटों खड़ा रहने के बाद भी मरीजों की पर्चीयां नही बनी। इसके अव्यवस्था इतनी बढ़ गई कि काउंटर पर मौजूद एकमात्र कर्मचारी को देख लोगों के सब्र का बांध टूट गया। वह आपस में ही उलझते नजर आये।संविदा कर्मियों के काम छोड़ने और एक साथ छुट्टी पर जाने से व्यवस्था चरमरा गई।
लाभार्थियों के लिये सरकारी इलाज से दवा में परेशानी
एमबीएस अस्पताल से सामने आयी तस्वीरे बताती है कि आरजीएचएस को लेकर निजी अस्पतालों के विरोध के चलते सरकारी तंत्र पूरी तरह से बैकअप प्लान के बिना चल रहा है, जिसका खामियाजा आम जनता और बुजुर्ग पेंशनर्स को भुगतना पड़ रहा है। मरीजों की परेशानी है कि वह निजी अस्पताल में इलाज ले नहीं पा रहे यदि सरकारी मे सामान्य पर्ची से इलाज लेते है तो उन्हे पहले से चल रही ब्राण्ड़ेड दवाओं को सरकारी डॉक्टर सरकारी पर्चे पर नहीं लिख सकता।
5 में से 4 ऑपरेटर नदारद: सिस्टम हुआ फेल
जानकारी के अनुसार, आरजीएचएस काउंटर के सुचारू संचालन के लिए कुल 5 कंप्यूटर ऑपरेटर नियुक्त हैं, जिनमें से 3 सुबह और 2 शाम की शिफ्ट में रहते हैं। लेकिन सोमवार को बदहाली का आलम यह था कि ऑपरेटर चेतन शर्मा ने काम छोड़ दिया। ऑपरेटर जीतू सहित अन्य कार्मिक छुट्टी पर चले गए। काउंटर पर केवल एक मात्र कर्मचारी योगेंद्र मौजूद था। जिससे लोगों के ओपीड़ी,भर्ती तथा डिस्चार्ज के लिये घंटों लगने लगे।
भर्ती व डस्चार्ज की प्रक्रिया में लगता है समय
बाहर खडे मरीजों में भर्ती-डिस्चार्ज की जटिल प्रक्रिया के बीच अकेला कर्मचारी पर्ची नहीं काट पा रहा था। जिससे कतार में खड़े बुजुर्गों और तीमारदारों का गुस्सा फूट पड़ा और पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई। ऐसे में सामान्य ओपीड़ी के लिये आये मरीजों को आरजीएचएस की पर्ची न बनने के कारण बिना इलाज के लौटना पड़ा।
बुआ को लेने जाने की जिद पर अड़ा
हैरानी की बात यह रही कि मुख्य नर्सिंग इंचार्ज खुद ड्यूटी से नदारद थे। इंचार्ज का जिम्मा संभाल रहीं वर्षा राठौर ने आनन-फानन में व्यवस्था संभालने के लिए एक लिफ्ट ऑपरेटर को पर्ची काउंटर पर बैठाया। लेकिन तमाशा तब खड़ा हुआ जब वह लिफ्ट ऑपरेटर भी थोड़ी देर बाद अपनी 'बुआ' को लेने जाने की जिद पर अड़ गया। लगभग 40 मिनट तक प्रभारी वर्षा उस ऑपरेटर की मान-मनुहार करती नजर आईं ताकि काउंटर चालू रह सके।
मरीजों का फूटा गुस्सा, इंचार्ज को सुनाई खरी-खोटी
निजी अस्पतालों में इलाज बंद होने के कारण मजबूरी में सरकारी अस्पताल पहुंचे मरीजों को यहाँ भी भारी जद्दोजहद करनी पड़ी। घंटों इंतजार से झल्लाए लोगों ने अस्पताल प्रशासन की कुप्रबंधन पर नाराजगी जताई और मौके पर मौजूद प्रभारी को भी खरी-खोटी सुनाई। मरीजों का आरोप है कि जब निजी क्षेत्र में विरोध के चलते सरकारी अस्पतालों में भीड़ बढ़ना तय था, तो प्रशासन ने अतिरिक्त स्टाफ की व्यवस्था क्यों नहीं की?
संविदा पर लगे कार्मिकों के काम छोडने और छुट्टी के समय लिफ्ट पर लगाये गये व्यक्ति को इमरजेन्सी में ऑपरेटर पर लगाया गया था। सभी को मौके पर मौजुद इंचार्ज के निर्देशों के अनुसार काम करना चाहिये।
- नरेन्द्र खींची, नर्सिंग इन्चार्ज
मै सुबह ओपीड़ी की तरफ गया था मुझे किसी ने इस बारें में सूचना नहीं दी। नर्सिंग इंचार्ज से जानकारी जुटाई जा रही है।
- डॉ. धर्मराज मीणा अधीक्षक एमबीएस अस्पताल

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