असर खबर का : चंबल के बूढ़े बांधों को अब मिलेगी संजीवनी, जीर्णोद्धार पर 225 करोड़ रुपए की आएगी लागत

नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला

असर खबर का  : चंबल के बूढ़े बांधों को अब मिलेगी संजीवनी, जीर्णोद्धार पर 225 करोड़ रुपए की आएगी लागत

कोटा बैराज, राणाप्रताप सागर व जवाहर सागर में होंगे सुधार कार्य।

कोटा। चम्बल नदी के बांधों के लिए उन्नयन की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राणा प्रताप सागर बांध, जवाहर सागर बांध और कोटा बैराज के आधुनिकीकरण के लिए लगभग 225 करोड़ रुपए की लागत से कार्य कराए जाएंगे। बांधों के पुनर्वास और सुरक्षा सुधार के लिए यह कार्य डैम रिहैबिलिटेशन एंड इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट (ड्रिज्प फेज-2) के तहत होंगे। इनके लिए निविदा जारी कर दी गई है। इससे क्षेत्र में जल प्रबंधन, सिंचाई और विद्युत उत्पादन को अधिक सुदृढ़ किया जा सके।

60 साल बाद कोटा बैराज के गेटों का होगा रिप्लेसमेंट
कोटा जिले की लाडपुरा तहसील स्थित कोटा बैराज के वर्ष 1960 में निर्माण के बाद से हाइड्रो-मैकेनिकल कार्यो में कोई बड़ा रिप्लेसमेंट/ओवरहालिंग कार्य नहीं हुआ है। इसके 19 रेडियल गेट और 2 स्लुइस गेट की स्थिति ठीक नहीं है। स्लुइस गेट कई वर्षों से निष्क्रिय हैं। अब इस प्रोजेक्ट के तहत 19 रेडियल गेटों, 2 स्लुइस गेटों, 2 सैट स्टॉपलोग गेट, गैन्ट्री क्रेन और विद्युत उपकरणों को बदलने का कार्य करते हुए व्यापक आधुनिकीकरण किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि कोटा और बूंदी जिलों की पेयजल और सिंचाई आवश्यकताओं को देखते हुए सुधार कार्यों के दौरान भी बैराज का जल स्तर 854.50 फीट पर बना रहेगा। सभी कार्य पूर्ण जल भराव की स्थिति में ही सम्पादित होंगे।

बिना विद्युत उत्पादन बाधित किए होगा सुदृढ़ीकरण
चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित राणा प्रताप सागर बांध, चम्बल परियोजना का प्रमुख जल भंडारण केन्द्र है। यह बांध पेयजल और सिंचाई के लिए जल उपलब्धता के साथ-साथ 172 मेगावाट की विद्युत उत्पादन क्षमता रखता है। इसके राष्ट्रीय महत्व को देखते हुए रखरखाव और उन्नयन कार्य कराए जा रहे हैं। बिजली उत्पादन और पेयजल आपूर्ति को बिना बाधित किए इस बांध के 17 वर्टिकल क्रेस्ट गेटों, गेन्ट्री क्रेन, 4 स्लुइस गेटों, स्टॉपलोग गेटों को बदलने और स्काई-जंप बकेट की मरम्मत का कार्य किया जाएगा। ये वर्टिकल गेट 18408 क्यूमेक्स तक की बाढ़ निकासी क्षमता रखते हैं।

जवाहर सागर बांध में होगा तकनीकी उन्नयन
बूंदी जिले के तालेड़ा ब्लॉक में राणा प्रताप सागर बांध के नीचे (डाउनस्ट्रज्ीम में) स्थित जवाहर सागर बांध वर्ष 1972 में बना था। लगभग 33.66 मीटर ऊंचे बांध की सुरक्षा और 99 मेगावाट क्षमता वाले पावर हाउस की दक्षता बढ़ाने के लिए बुनियादी ढांचे का विकास और तकनीकी सुधार किए जाएंगे। यह संरचना चंबल नदी के प्रवाह को नियंत्रित करने और डाउनस्ट्रीम जल प्रबंधन में अहम भूमिका निभाती है। बांध में 15.24 मीटर चौड़ाई एवं 13.41 मीटर ऊंचाई के 12 रेडियल गेट हैं। इसकी भराव क्षमता 67.11 एमसीयूएम है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार परियोजना के सभी कार्य उच्च गुणवत्ता मानकों के अनुरूप और समयबद्ध पूर्ण किए जाएंगे। तीनों बांधों के उन्नयन से जल संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ उनकी आयु में भी वृद्धि होगी। हाड़ौती क्षेत्र की सिंचाई और पेयजल सुरक्षा भी लम्बे समय तक सुनिश्चित रहेगी और शहरी विकास को भी गति मिलेगी।

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नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला
चंबल नदी पर बने प्रदेश के प्रमुख बांध कोटा बैराज, जवाहर सागर और राणाप्रताप सागर के सम्बंध में छह साल से सर्वे लेकिन काम नहीं फाइलों में कैद चबंल के बांधों का जीर्णोद्धार शीर्षक से दो अप्रैल को दैनिक नवज्योति में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। इसमें बताया था कि इन बांधों के नवजीवन के लिए करोड़ों रुपए का बजट स्वीकृत हो चुका है। हर साल निविदाएं जारी होती हैं, लेकिन कार्य शुरू होने से पहले ही प्रक्रिया फिर किसी ने किसी कारण से अटक जाती है। इन बांधों के सुधार को लेकर पिछले 5-6 वर्षों से लगातार सर्वे और तकनीकी अध्ययन किए जा रहे हैं। राणा प्रताप सागर बांध के स्लूज गेट बदलने के लिए अंडरवाटर सर्वे तक पूरा हो चुका है। केंद्रीय जल आयोग सहित विभिन्न एजेंसियों के विशेषज्ञों ने भी निरीक्षण कर रिपोर्ट दी, लेकिन इसके बावजूद काम शुरू नहीं हो सका है। 

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