बारूद के ढेर पर खड़ा हजारों बच्चों का जीवन
अधिकतर बहुमंजिला हॉस्टलों में नहीं फायर सिस्टम
प्रशासन द्वारा ऐसे हॉस्टल सचालकों के खिलाफ सख्ती व कठोर कार्रवाई करने की आवश्यकता है।
कोटा। केस 1 - कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र स्थित लैंडमार्क सिटी के एक हॉस्टल में गत दिनों आग लगने की घटना हुई थी। रात के समय अचानक हुई इस घटना से उस हॉस्टल में रहने वाले बच्चे घबरा गए थे। बड़ी मुश्किल से उन्हें हॉस्टल से बाहर निकाला गया। जांच में उस हॉस्टल में फायर सिस्टम लगा हुआ नहीं मिला। जिस पर हॉस्टल सचालक को नोटिस दिया गया।
केस 2 - जवाहर नगर थाना क्षेत्र स्थित एक गर्ल्स हॉस्टल में गत दिनों आग लगने की घटना हुई थी। जिससे उस हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं का जीवन संकट में पड़ गया था। फायर टीम ने मौके पर पहुंचकर आग तो बुझा दी लेकिन वहां जांच करने पर फायर सिस्टम ही लगा हुआ नहीं मिला। इस पर हॉस्टल सचालक को नोटिस दिया गया।
केस 3 - तलवंडी स्थित एक बहुमंजिला हॉस्टल में कुछ समय पहले आग लग चुकी है। आग ऊपरी हिस्से में लगी थी। लेकिन उस हॉस्टल से बाहर निकलने का एक ही रास्ता था। जिससे बड़ी मुश्किल से बच्चों को बाहर निकाला गया। यहां भी जांच करने में फायर सिस्टम नहीं मिले। जिस पर निगम के फायर अनुभाग ने संचालक को नोटिस दिया।
ये उदाहरण पर्याप्त हैं शहर के हॉस्टलों की दशा बताने को। शहर में ऐसे सैकड़ों हॉस्टल हैं जो बहुमंजिला बने हुए हैं। करोड़ों रुपए की लागत से बने इस हॉस्टलों में देशभर से यहां मेडिकल व इंजीनियरिंग की कोचिंग करने वाले हजारों छात्र छात्राएं रह रहे हैं। 3 से 8 मंजिला तक बने इस हॉस्टलों में बच्चों के रहने व खाने से लेकर हर तरह की सुविधा दी हुई है। लेकिन सबसे जरूरी सुविधा आग से बचाव के लिए फायर सिस्टम की है वही लगे हुए नहीं है। इसका अंदाजा नगर निगम के फायर अनुभाग द्वारा समय-समय पर हॉस्टलों में अग्नि सुरक्षा उपकरणों की जांच से लगाया जा सकता है। जहां जांच में अधिकतर की स्थिति बदतर पाई जाने पर उन्हें नोटिस दिए जा रहे हैं। हालांकि निगम भी मात्र नोटिस देकर ही इतिश्री कर रहा है। प्रशासन द्वारा ऐसे हॉस्टल सचालकों के खिलाफ सख्ती व कठोर कार्रवाई करने की आवश्यकता है।
इन क्षेत्रों में हैं हॉस्टलों की बाढ़
शहर का ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जहां बहुमंजिला हॉस्टल बने हुए नहीं हों। विशेष रूप से नए कोटा से लेकर नदी पार और बारां रोड तक यही हालत है। जिस क्षेत्र में कोचिंग संस्थान हैं वहां इन हॉस्टलों की संख्या काफी अधिक है। हालत यह है कि कतार से एक के बाद एक कई हॉस्टल बने हुए हैं। जिससे उनकी बाढ़ सी आई हुई है। जवाहर नगर, तलवंडी, राजीव गांधी नगर, इंद्र विहार, दादाबाड़ी, विज्ञान नगर, महावीर नगर, परिजात कॉलोनी, लैंडमार्क सिटी कुन्हाडी, बारां रोड नया नोहरा, कोरल पार्क, इलेक्ट्रोनिक्स कॉम्पलेक्स, रीको इंडस्ट्रीयल एरिया, रानपुर समेत कई क्षेत्रों में तो हॉस्टल रेल के डिब्बों की तरह बने हुए हैं। कई हॉस्टल तो वाच टावर की तरह के हैं। जहां छोटे से भूखंड पर कई मंजिला हॉस्टल हैं।
इस तरह की कमियां हैं हॉस्टलों में
नगर निगम के फायर अनुभाग द्वारा समय-समय पर हॉस्टलों की जांच की जा रही है। नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की ओर से पूर्व में की गई जांच के दौरान करीब 80 फीसदी ऐसे हॉस्टल व बहुमंजिला इमारतें पाई गई थी जिनमें आग से सुरक्षा के कोई इंतजाम ही नहीं थे। जहां सिस्टम लगे हुए हैं लेकिन वे सिर्फ दिखाने के लिए लगाए हुए हैं। उनमें से अधिकतर कार्यशील नहीं है। निगम अधिकारियों के अनुसार अधिकतर हॉस्टलों में प्रवेश व निकास का एक ही रास्ता है। आग लगने की घटना होने पर वहां से बच्चों को निकलने में परेशानी हो सकती है। कहीं फायर सिस्टम है तो चालू हालत में नहीं है। कहीं फायर के छोटे उपकरण लगे हुए हैं लेकिन वे अवधि पार हो चुके हैं। कहीं पानी की सुविधा तक नहीं है। कई हॉस्टलों में तो दमकलों तक पहुंचने तक की सुविधा नहीं है।
करीब एक हजार से अधिक नोटिस
नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण के फायर अनुभाग की ओर से पूर्व में की गई हॉस्टलों व बहुमंजिला इमारतों की जांच में फायर सिस्टम नहीं पाए जाने पर नोटिस जारी किए गए हैं। नगर निगम कोटा दक्षिण की ओर से करीब 700 से अधिक और कोटा उत्तर में 300 से अधिक नोटिस जारी किए जा चुके हैं। हालत यह है कि नगर निगम कोटा दक्षिण के फायर अनुभाग की ओर से वर्तमान में इलेक्ट्रोनिक्स कॉम्पलेक्स में हॉस्टलों की जांच की जा रही है। दो दिन में ही 21 हॉस्टलों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
फायर एनओसी की औपचारिकता निभा रहे
जानकारों के अनुसार नगर निगम के फायर अनुभाग कीओर से जांच में कमी पाए जाने पर नोटिस देकर इतिश्री की जा रही है। हालत यह है कि 7 दिन का नोटिस मिलने पर कई हॉस्टल संचालक नगर निगम में फायर एनओसी के लिए आवेदन कर औपचारिकता निभा रहे हैं। जबकि फायर एनओसी के लिए यूडी टैक्स जमा होना आवश्यक है। अधिकतर हॉस्टल संचालकों का यूडी टैक्स ही जमा नहीं है। ऐसे में उन्हें एनओसी ही नहीं मिल सकती।
सीजिंग होने पर ही लगाएंगे सिस्टम
हॉस्टलों को बनाने पर जब लाखों करोÞड़ों रुपए खर्च कर सकते हैं तो कुछ रुपए फायर सिस्टम लगाने पर भी खर्च होने चाहिए। फायर सिस्टम नहीं होने पर हॉस्टल संचालन की अनुमति ही नहीं मिलनी चाहिए। यदि फायर सिस्टम नहीं है तो उन हॉस्टलों को सीज किया जाए। पूर्व में कई हॉस्टल, मॉल व होटलों को सीज करने पर उन्होंने फायर सिस्टम लगाए हैं।
- देवेन्द्र जांगिड़, कैथूनीपोल
ठोस कार्रवाई हो, तभी सुधार संभव
कोटा की छवि देशभर में शिक्षा नगरी के रूप में बनी है। उसी कारण यहां करीब दो लाख बच्चे बाहर से आकर रह रहे हैं। उनकी सुरक्षा करना प्रशासन के साथ हॉस्टल सचालकों की है। आग से सुरक्षा के इंतजाम प्राथमिकता है। यदि ऐसा नहीं हो रहा है तो हॉस्टल संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने पर ही सुधार संभव होगा।
- संजय विजय, छावनी
किराया हजारों रुपए तो सुरक्षा भी हो
हॉस्टलों में रहने वाले हर बच्चे से महीने का करीब 15 से 20 हजार रुपए किराया लिया जा रहा है। जिसमें सुविधाएं तो सभी दी जा रही है। लेकिन आग की घटना से सुरक्षा के इंतजाम नहीं होना गम्भीर है। जब किराया अधिक ले रहे हैं तो बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी हॉस्टल संचालकों की है।
- हरीश नामा, महावीर नगर प्रथम
इनका कहना है
नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण में फायर अनुभाग की टीमें समय-समय पर हॉस्टल व बहुमंजिला आवासीय इमारतों की जांच करती रहती है। अधिकतर हॉस्टलों में फायर सिस्टम लगे हुए नहीं हैं। ऐसे में कोटा दक्षिण में 700 से अधिक व कोटा उत्तर में 300 से अधिक नोटिस दे रखे हैं। उनमें से कई संचालकों ने फायर एनओसी के लिए आवेदन किए हुए हैं। दक्षिण में करीब 500 और उत्तर में 250 एनओसी जारी की जा चुकी है। हॉस्टलों की जांच का अभियान लगातार जारी है। पूर्व में हॉस्टल, होटल व मॉल तक को सीज किया गया है।
- राकेश व्यास, सीएफओ, नगर निगम कोटा दक्षिण

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