विश्व ऑटिज्म जागरुकता दिवस आज : बच्चों में बढ़ती न्यूरो-डेवलपमेंटल समस्याओं के बीच ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर एक गंभीर चुनौती

समय पर पहचान और काउंसलिंग से काफी सुधार संभव

विश्व ऑटिज्म जागरुकता दिवस आज : बच्चों में बढ़ती न्यूरो-डेवलपमेंटल समस्याओं के बीच ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर एक गंभीर चुनौती

बच्चों में बढ़ती न्यूरो-डेवलपमेंटल समस्याओं के बीच ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर एक गंभीर चुनौती। इस स्थिति से प्रभावित बच्चे अक्सर अपनी ही दुनिया में खोए रहते हैं, सामाजिक संपर्क कम करते हैं और व्यवहार में असामान्य प्रतिक्रियाएं दिखाते हैं।

उदयपुर। बच्चों में बढ़ती न्यूरो-डेवलपमेंटल समस्याओं के बीच ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (एएसडी) एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। इस स्थिति से प्रभावित बच्चे अक्सर अपनी ही दुनिया में खोए रहते हैं, सामाजिक संपर्क कम करते हैं और व्यवहार में असामान्य प्रतिक्रियाएं दिखाते हैं। जागरूकता बढ़ाने और समय पर पहचान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से हर वर्ष 2 अप्रैल को विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस मनाया जाता है। एमबी हॉस्पिटल के मनोरोग विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार, कई बार ऐसे बच्चों को कम बुद्धि वाला समझ लिया जाता है, जबकि अधिकांश मामलों में उनकी बुद्धि सामान्य होती है। असल समस्या उनके सामाजिक व्यवहार और संवाद क्षमता में होती है। विश्व स्तर पर करीब 100 में से 1 बच्चा ऑटिज्म से प्रभावित पाया जाता है। भारत और राजस्थान में भी इसकी दर लगभग 1 प्रतिशत के आसपास मानी जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में मामलों की संख्या से ज्यादा पहचान और निदान में वृद्धि हुई है, जो बढ़ती जागरूकता का संकेत है। हाल ही में भीलवाड़ा से आए 8 वर्षीय बच्चे की जांच में सामने आया कि वह शारीरिक रूप से स्वस्थ और सामान्य बुद्धि का है, लेकिन किसी गतिविधि में रुचि नहीं लेता और अधिकतर चुप रहता है। आसपास की हलचल उसे विचलित करती है और वह अचानक आक्रामक व्यवहार करने लगता है। चिकित्सकों के अनुसार यह ऑटिज्म स्पेक्ट्रम से जुड़ा संकेत हो सकता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि ऑटिज्म मस्तिष्क के विकास से संबंधित समस्या है, जिसमें आनुवांशिक कारण भी भूमिका निभा सकते हैं। कई बार बच्चे शांत और कम बोलने वाले होते हैं, जिसे अभिभावक सामान्य मान लेते हैं और समस्या देर से सामने आती है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ
वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेश गोचर के अनुसार अधिकांश ऑटिज्म के बच्चे बाल चिकित्सालय से रैफर होकर हमारे पास आते हैं। हर माह ऐसे 1-2 मामले सामने आते हैं। यह स्थिति ऐसी है जिसमें बच्चे की बुद्धि सामान्य भी हो सकती है और बौद्धिक अक्षमता भी हो सकती है। समय पर पहचान और काउंसलिंग से काफी सुधार संभव है। 

रोगी के उपचार में काउंसलिंग अहम
विशेषज्ञों के अनुसार ऑटिज्म में दवाइयों की भूमिका सीमित होती है। इसके उपचार में पेरेंटल काउंसलिंग, व्यवहार चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक परामर्श सबसे प्रभावी उपाय हैं। समय पर पहचान होने पर बच्चे के व्यवहार और सामाजिक कौशल में सुधार संभव है।

Read More पांच बच्चों की मौत का मामला : सैंपलों की न्यूरोपैनल जांच, सभी नेगेटिव ; चिकित्सा टीमों का घर-घर सर्वे जारी

पहचान के प्रमुख संकेत
बच्चा अपनी ही दुनिया में रहना
लोगों से कम संवाद करना
गतिविधियों में रुचि की कमी
बार-बार एक ही व्यवहार दोहराना
अचानक गुस्सा या चिड़चिड़ापन
सामाजिक तालमेल में कठिनाई 

Read More रहस्यमयी बीमारी से दो और मासूमों की मौत : सात दिन में 7 बच्चों की गई जान, लसाड़िया के बाद झल्लारा क्षेत्र में फैली दहशत

Related Posts

Post Comment

Comment List

Latest News

सरे राह युवती का टॉप खींचने वाले चार बदमाश गिरफ्तार : पुलिस ने टोंक से पकड़ा, आरोपी मनराज के खिलाफ पूर्व में दर्ज हैं कई आपराधिक प्र्रकरण सरे राह युवती का टॉप खींचने वाले चार बदमाश गिरफ्तार : पुलिस ने टोंक से पकड़ा, आरोपी मनराज के खिलाफ पूर्व में दर्ज हैं कई आपराधिक प्र्रकरण
प्रारंम्भिक पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि शराब पीने के शौकीन है। वीडियो में बाइक चला रहा मनराज मीणा और...
रहस्यमयी बीमारी से एक और बालिका ने तोड़ा दम, प्रतापगढ़ सीएमएचओ को हटाया
भाजपा ने शिवराज सिंह को सौंपी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी : बिहार में भाजपा विधायक दल के नेता चयन के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त, नई सरकार के गठन की दिशा में अहम कदम
अशोक गहलोत ने आरजीएचएस सुविधाओं को लेकर भाजपा सरकार को घेरा : संवेदनहीन सरकार में मेडिकल सेवाएं बदहाल, कहा- विधायक भी परेशान
ज्वैलरी शॉप पर चोरों का धावा : दुकान के गेट तोड़कर अंदर घुसे बदमाश, चांदी के गहने और 7 ग्राम सोने के आभूषण ले उड़े बदमाश
मोदी ने टीएमसी पर साधा निशाना : देश में टुकड़े-टुकड़े गैंग ने दी थी सिलीगुड़ी गलियारे को काटने की धमकी, बोले- तृणमूल बंगाल विरोधी और भाजपा है विकास का चालक
महिला विधेयक पर मोदी का सभी दलों को पत्र : दल को परे रखकर एकस्वर में करें पारित, लिखा- विधेयक पर होने वाली चर्चा लोकतंत्र को और सशक्त बनाने का अवसर